प्रदूषण एनओसी लेना हुआ महंगा, योगी सरकार ने शुल्क ढाई से तीन गुना तक बढ़ाया
UP News: उत्तर प्रदेश में उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण की एनओसी और सहमति पत्र (कंसेंट) अब पहले से काफी महंगे पड़ेंगे। प्रदेश की योगी सरकार ने उद्योगों की श्रेणी के अनुसार इन शुल्कों में ढाई से तीन गुना तक की वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
Publish Date: Wed, 03 Dec 2025 04:10:07 PM (IST)
Updated Date: Wed, 03 Dec 2025 04:11:00 PM (IST)
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।HighLights
- कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई
- हर वर्ष देना होगा पूरा नवीनीकरण शुल्क
- श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग शुल्क
डिजिटल डेस्क। उत्तर प्रदेश में उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण की एनओसी और सहमति पत्र (कंसेंट) अब पहले से काफी महंगे पड़ेंगे। योगी सरकार ने उद्योगों की श्रेणी के अनुसार इन शुल्कों में ढाई से तीन गुना तक की वृद्धि करने का निर्णय लिया है। लाल श्रेणी के उद्योगों पर सर्वाधिक और हरी श्रेणी पर सबसे कम शुल्क लागू होगा।
मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। वर्ष 2008 के बाद यानी 17 साल में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी है।
हर वर्ष देना होगा पूरा नवीनीकरण शुल्क
अब तक उद्योगों को पहले वर्ष पूर्ण शुल्क और उसके बाद हर वर्ष उसके आधे शुल्क का नवीनीकरण करना पड़ता था। नई व्यवस्था में उद्योगों को हर साल शुरुआती शुल्क के बराबर ही नवीनीकरण शुल्क देना होगा। साथ ही हर दो वर्ष में शुल्क में 10% तक की वृद्धि की अनुमति भी दे दी गई है।
कैबिनेट ने जल और वायु प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी शुल्क संरचना में बदलाव के लिए उत्तर प्रदेश जल (मल एवं व्यावसायिक बहिस्राव निस्तारण हेतु सहमति) (तृतीय संशोधन) नियमावली तथा उत्तर प्रदेश वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) (चतुर्थ संशोधन) नियमावली को स्वीकृति प्रदान की है।
श्रेणियों के अनुसार अलग-अलग शुल्क
संशोधन के बाद अब एनओसी शुल्क तीन रंग आधारित श्रेणियों लाल, नारंगी और हरी के आधार पर लिया जाएगा। लाल श्रेणी सर्वाधिक प्रदूषण, इसलिए सर्वाधिक शुल्क। नारंगी श्रेणी मतलब मध्यम प्रदूषण, इसलिए मध्यम शुल्क और हरी श्रेणी का मतलब न्यूनतम प्रदूषण, इसलिए न्यूनतम शुल्क।
सरकार का कहना है कि इससे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी, मानव संसाधन और तकनीकी क्षमताओं में वृद्धि होगी तथा प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी और प्रभावी हो सकेगी।
एक हजार करोड़ से अधिक निवेश वाले उद्योग अब एक ही स्लैब में
सरकार ने निवेश आधारित शुल्क श्रेणियों में भी बड़े बदलाव किए हैं। पहले 12 स्लैब थे, जिन्हें घटाकर अब सात कर दिया गया है। एक हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाले उद्योगों के तीन अलग-अलग स्लैब को खत्म कर एक ही श्रेणी बना दी गई है। पहले इन उद्योगों पर अलग-अलग शुल्क थे।
अब इन सभी को एक ही स्लैब में समाहित कर दिया गया है, जिसके अनुसार हरी श्रेणी में 5 लाख रुपये प्रति वर्ष, नारंगी श्रेणी में 5.75 लाख रुपये प्रति वर्ष और लाल श्रेणी में 6.50 लाख रुपये प्रति वर्ष शामिल है। इसके अलावा, एक करोड़ रुपये से कम निवेश वाले उद्योगों के चार अलग-अलग शुल्क स्लैब को भी घटाकर एक कर दिया गया है।