किसने की थी पांडवों के वंश को कोख में खत्म करने की कोशिश?


By Prakhar Pandey01, Jan 2024 07:06 PMnaidunia.com

महाभारत का युद्ध

महाभारत के युद्ध में जीत के लिए अधर्मियों ने सभी हदों को पार कर दिया था। आइए जानते है किस कायर योद्धा ने पांडवों के वंश को कोख में खत्म करने की कोशिश की थी?

युद्धभूमि

महाभारत के युद्ध में जब कौरव हर जतन करके भी पांडवों नहीं हरा पाए तो अंतत: उन्होंने एक भयानक चाल चली। महाभारत के युद्ध में दुर्योधन समेत सभी 100 भाई मारे गए थे।

कौरवों का छल

कौरवों ने सबसे पहले छल करके अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को युद्ध भूमि में मार दिया था। इसके बदले में पांडवों ने कौरवों के सभी महारथी और शूरवीरों को योजना बनाकर हरा दिया था।

दुर्योधन की मृत्यु

महाभारत के युद्ध में सबसे अंत में दुर्योधन मारा गया था। दुर्योधन की मृत्यु के समय उसके पास अश्वत्थामा गया था। अश्वत्थामा से दुर्योधन ने अपनी इच्छा पूरी करने का वचन मांगा था।

अश्वत्थामा का वचन

अश्वत्थामा से दुर्योधन ने यह वचन मांगा था कि वे सभी पांडवों का वध कर दें। अश्वत्थामा दुर्योधन का मित्र था, इसलिए उसने दुर्योधन के कहने पर रात्रि के समय पांडवों के विश्राम कक्ष में प्रवेश किया था।

पुत्रों का वध

अश्वत्थामा ने रात्रि के समय धोखे से द्रौपदी के सभी पांचों पुत्रों को मार दिया था। यह बात पता लगने पर जब श्रीकृष्ण समेत पांचों पांडव अश्वत्थामा के पास पहुंचे तो वह दुर्योधन को अंत्येष्टि दे रहा था।

अभिमन्यु का पुत्र

पांडवों के साथ बहस में जब अश्वत्थामा को यह पता चला कि अब भी पांडवों के कुल का नाश नहीं हुआ है और अभिमन्यु का पुत्र उत्तरा की कोख में पल रहा है। तो उसने ब्रह्मास्त्र का उपयोग करके उत्तरा का कोख में वार किया।

ब्रह्मास्त्र का उपयोग

ब्रह्मास्त्र का उपयोग होता देखकर श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को चिरकाल तक भटकते रहने का श्राप दिया था। श्री कृष्ण ने अपने पुण्य का उपयोग करके उत्तरा के पुत्र परीक्षित को नया जीवन दिया था।

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