शास्त्रों में इस उपरत्न को मणि की संज्ञा दी गयी है। मान्यता है कि इस उपरत्न में भगवान वास करते हैं।
स्फटिक पहाड़ों पर पाया जाता है, इसलिए इसकी तासीर ठंडी होती है। यह शारीरिक और मानसिक कष्टों को दूर करता है।
स्फटिक को हीरे का उपरत्न माना गया है, इसलिए इसे शुक्र रत्न भी कहते हैं। इसका प्रभाव रत्नों से अधिक होता है।
शुक्र को मजबूत करने के लिए जो लोग हीरा नहीं पहन सकते, उन्हें स्फटिक की माला पहननी चाहिए।
स्फटिक की माला से किसी भी मंत्र का जाप करने से तुरंत सिद्धि की प्राप्ति होती है। इसे कोई भी धारण कर सकता है।
स्फटिक को सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है। यह खून की गर्मी से होने वाले रोगों में लाभकारी होती है।