4 जुलाई यानी आज से सावन का आगाज हो गया है। इस पूरे महीने लोग शिव जी की पूजा अर्चना करते हैं। साथ ही, कुछ भक्त कावड़ भी लेकर आते हैं।
हिंदू धर्म के मुताबिक, सावन के महीने में आने वाले सभी सोमवार को महिला-पुरुष व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। चलिए इसके पीछे का लॉजिक जान लेते हैं।
सावन के पूरे महीने में बारिश होती है, जिसकी वजह से काफी बीमारियों के होने की संभावनाएं भी बन जाती हैं। ऐसे में शरीर के लिए फास्टिंग करने का खास महत्व है।
आयुर्वेद में कहा गया है कि बारिश की वजह से सब्जियां खराब हो जाती है। साथ ही हरी सब्जियों में कीड़े भी लग जाते हैं, जिन्हें खाने से पेट संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
इस मौसम में दूध पीने के लिए मना किया जाता है, क्योंकि घास में कीड़े लग जाते हैं। ऐसे में गाय या भैंस घास खाती है तो उनका दूध टॉक्सिक हो जाता है।
वैसे तो बरसात के महीने में चारों तरफ हरियाली छा जाती है, लेकिन इस मौसम में उमस भी ज्यादा होती है। यह उमस पाचन तंत्र को प्रभावित करती है।
इस मौसम में पेट से जुड़ी समस्या के बढ़ने की उम्मीद बनी रहती है, जिसके चलते पेट खराब, बदहजमी, एसिडिटी, सूजन जैसी परेशानियों का लोगों को सामना करना पड़ता है।
आयुर्वेद के मुताबिक, अगर आप सावन के महीने में व्रत रखते हैं तो इससे आप पेट से संबंधित कई बीमारियों से बच पाएंगे। धार्मिक महत्व के साथ ही व्रत शरीर के लिए भी लाभदायक है।