भौमवती अमावस्या दिसंबर माह में 12 तारीख को मनाई जाने वाली है। आइए जानते है हवन-पूजन और स्नान के लिए शुभ मुहूर्त के बारे में।
भौमवती अमावस्या के दिन पूजा-अर्चना करने से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते है। इस अमावस्या पर भी गंगा और अन्य पवित्र नदियों के स्नान का खास महत्व होता है।
इस पर्व पर विधि पूर्वक पूजा-पाठ करने से पितृदोष और मंगलदोष दूर होता है। भौमवती अमावस्या पर दान का भी खास महत्व होता है।
मंगलवार को 12 दिसंबर को सुबह 5 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर अगले दिन सुबह 5 बजकर 1 मिनट पर समाप्त होगी।
भौमवती अमावस्या के इस पर्व पर स्नान की तिथि 12 दिसंबर को सुबह 5 बजकर 14 मिनट से लेकर सुबह 6 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।
स्नान के पश्चात तर्पण का शुभ मुहूर्त दोपहर में 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर के 12 बजकर 35 मिनट तक है। इस दौरान ही तर्पण की क्रिया करना शुभ रहेगा।
इस अमावस्या पर स्नान, दान और श्रद्धा भाव से पूजा करने से देवराज इंद्र, सूर्य और पितरों की कृपा प्राप्त होती है। पितर प्रसन्न होकर अपने वंशों को सुख भोगने का आशीर्वाद देते है।
भौमवती अमावस्या का पर्व मंगलवार के दिन पड़ रहा है। इस दिन हनुमान जी की पूजा करने से मंगलदोष दूर हो सकता है। साथ ही, आर्थिक समस्याओं से भी राहत मिलती है।