चैत्र मास में आने वाली पूर्णिमा को चैत्र पूर्णिमा कहा जाता है। यह हिंदू वर्ष का पहला महीना है। इस पूर्णिमा को चैती पूनम भी कहते हैं।
इस दिन भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा की जाती है। इस साल चैत्र पूर्णिमा 5 अप्रैल को है।
उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा स्नान और दान 6 अप्रैल को किया जाएगा। चैत्र पूर्णिमा के दिन स्नान और दान करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन कुछ विशेष कार्य करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। वहीं, इस दिन कुछ चीजों की मनाही होती है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन देर तक न सोएं। सुबह जल्द उठकर स्नान करके भगवान विष्णु की पूजा करें।
चैत्र पूर्णिमा के दिन मांसाहार और शराब का सेवन न करें। इस दिन नॉनवेज खाने से मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन आपका व्यवहार शुद्ध होना चाहिए। इस दिन किसी को अपशब्द ना कहें।
तुलसी के पत्ते भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। पूर्णिमा के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ना चाहिए।
पूर्णिमा की रात दही का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे चंद्र दोष लगता है। वहीं, व्यक्ति को विभिन्न कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
पूर्णिमा के दिन चांद का प्रभाव सबसे अधिक होता है। इसलिए चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए, ताकि कुंडली में दोष दूर हो सके।