आज के समय में लोग अक्सर अकेलेपन(loneliness) और अकेले(Alone) रहने जैसे टर्म्स का यूज करते हैं। हालांकि, ये अलग-अलग इमोशनल और मेंटल एक्सपीरिएंस को दर्शाते हैं। दोनों में ही एकांत शामिल है।
अगर आप भी अकेलेपन और अकेले को एक ही समझते हैं, तो यह आपकी गलतफहमी है। चलिए जानते हैं इन दोनों में क्या अंतर होता है।
अकेले रहने का मतलब एक फिजिकल स्टेट है, जहां एक शख्स दूसरों की संगती में नहीं होता है। ये अक्सर पर्सनल टाइम या किसी अन्य कारण से लिया गया फैसला होता है।
अकेलापन एक इमोशनल स्टेट होता है। ये दूसरों के साथ मीनिंगफुल कनेक्शन की कमी से आने वाली उदासी या खालीपन की फीलिंग होती है।
इन दोनों में सबसे बड़ा फर्क च्वाइस और इमोशन का है। जब कोई इंसान अकेले रहना चुनता है तो वो इसका लुफ्त उठाता है। वहीं, जब कोई व्यक्ति एकांत रहता है तो उसे ये अकेलेपन की तरफ ले जाता है।
अगर को व्यक्ति अपनी पसंद से अकेला रहता है तो इससे वो खुश रह सकता है। इस समय का इस्तेमाल अपने शौक, आराम और सीखने के काम के लिए कर सकता है।
लंबे समय तक अकेलेपन से एंग्जाइटी और डिप्रेशन की समस्या हो सकती है। इससे सेहत में भी गिरावट आ सकता है।
Alone और loneliness में क्या अंतर है। इसी तरह की स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें naidunia.com