घर बनाने से पहले अक्सर लोग वास्तु ध्यान रखते हैं। घर में खिड़की, दरवाजों, सीढ़ी, पानी के टंकी के साथ-साथ पूजा घर का भी वास्तु के अनुसार स्थान होना चाहिए।
घर में मंदिर सही स्थान पर नहीं होने से कलह और नकारात्मकता आती है। स्वास्थ्य बाधा के साथ ही कामों में बाधाएं आती है, जो आपको बुरी से प्रभावित करती हैं।
घर में पूजा घर को सीढ़ियों के नीचे नहीं बनवाना चाहिए। यह अशुभ होता है। घर में कलह और नकारात्मकता का वास होता है। मन हमेशा व्यथित रहता है।
घर में मंदिर को कभी भी बाथरूम के बगल में नहीं बनवाना चाहिए। बाथरूम के ऊपर या फिर नीचे पूजा घर बनवाने से बचना चाहिए। घर के सदस्यों को कष्ट झेलना पड़ता है।
घर का मंदिर बेसमेंट में भी नहीं बनवाना चाहिए। वास्तु के हिसाब से ये शुभ नहीं माना जाता है। पूजा घर कभी अंधेरे में नहीं होना चाहिए, हमेशा खुली जगह में होना चाहिए।
बेडरूम में कभी भी पूजा घर नहीं बनाना चाहिए। घर में एक ही कमरा हो तो बेडरूम के उत्तर पूर्व में ही पूजा स्थल बनाएं। मंदिर के चारों तरफ पर्दे लगा दें।
पूजा घर में सभी मूर्तियां सही दिशा में हो। भगवान की प्रतिमा को कभी भी नैऋत्य कोण में नहीं रखना चाहिए। वास्तु में इसे शुभ नहीं माना जाता है।