जीवन में कई तरह की गलतियों से बचने की सलाह गीता में दी गई है। भीष्म पितामह की कई चेतावनी और सलाहों का उल्लेख भी गीता में मिलता है।
अर्जुन को बताते हुए भीष्म पितामह ने बताया कि किस तरीके का भोजन व्यक्ति को नहीं करना चाहिए। आइए भोजन करने से जुड़े कुछ नियमों के बारे में जान लेते हैं।
गीता के अनुसार, भीष्म पितामह ने बताया है कि व्यक्ति को थाली में भोजन करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। माना जाता है कि इन बातों को न मानने से अकाल मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है।
भीष्म पितामह ने अर्जुन को बताया कि कभी भी उस थाली में खाना न खाएं, जिसमें बाल गिरा हुआ मिलता है। ऐसे खाने को दूषित माना जाता है।
गीता में यह भी बताया गया है कि पति-पत्नी एक थाली में खाना खाते हैं तो उसे किसी नशे से कम नहीं माना जाता है।
भीष्म पितामह बताते हैं कि अगर थाली में किसी का पैर लग जाता है तो वह भोजन भी खाने योग्य नहीं रहता है। व्यक्ति को इस तरह के भोजन को करने से बचना चाहिए।
यदि आप टूटी हुई थाली में रोजाना खाना खाते हैं तो घर में दरिद्रता आती है। इस वजह से ऐसा भोजन करने से इंसान को बचना चाहिए।
यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यता और गीता पर आधारित है। हमारी तरफ से इसकी किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं की जा रही है।
यहां हमने जाना कि खाने को लेकर गीता में क्या नियम बताए गए हैं। ऐसी ही अन्य धर्म और अध्यात्म से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए जुड़े रहें naidunia.com के साथ