कार्तिक माह में कई महत्वपूर्ण पड़ते है। दीपावली के बाद छठ और इसी दौरान गोपाष्टमी पड़ती है। आइए जानते हैं क्यों खास है यह पर्व और क्या है इसका श्री कृष्ण से संबंध?
गोपाष्टमी व्रत कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि पर मनाया जाता है। 20 नवंबर 2023 को गोपाष्टमी व्रत रखा जाएगा।
गोपाष्टमी तिथि पर भगवान श्री कृष्ण और बलराम की पूजा की जाती है। इस दिन गौ माता की पूजा का विशेष महत्व होता हैं।
ज्योतिष जानकार पंडित चंद्रशेखर के अनुसार, गोपाष्टमी तिथि की शुरुआत 20 नवंबर की सुबह 5 बजकर 21 मिनट से होगी और अष्टमी तिथि 21 नवंबर को सुबह 3 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी।
गोपाष्टमी पूजन का उत्तर भारत में ज्यादा महत्व होता है और यह त्योहार ब्रज, मथुरा और वृंदावन समेत अन्य क्षेत्रों में काफी ज्यादा प्रसिद्ध है।
श्रीकृष्ण के अनुसार, ब्रजवासियों को इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया था। इस दौरान इंद्रदेव ने लगातार 7 दिन बारिश की और गोपाष्टमी के श्रीकृष्ण के सामने अपनी हार स्वीकार लीं।
पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, श्रीकृष्ण ने इन्द्र देव को दी जाने वाली वार्षिक भेंट देने से रोकने का सुझाव दिया था। कृष्ण के इस सुझाव से इन्द्र देव नाराज हो गए थे और ब्रज क्षेत्र में डुबाने का फैसला कर लिया था।
श्री कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत के नीचे पशु धन को गोवर्धन पर्वत को सुरक्षित कर लिया था। इसी के चलते गोपाष्टमी पर गायों, बछड़ों को सजाया जाता है। इस दिन गाय और बछड़ो की पूजा का विशेष महत्व होता है।