कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की हर प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा लोग मनाते हैं। दिवाली के ठीक एक दिन बाद यह मनाया जाता है।
इस दिन गोवर्धन भगवान की पूजा की जाती है। साथ ही गिरिराज के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा भी की जाती है।
गोवर्धन पूजा की तिथि, दिन सोमवार, 13 नवंबर की दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शुरू होकर कल यानी 14 नवंबर 2 बजकर 36 मिनट तक रहेगा।
गोवर्धन पूजा शुरू करने से पहले स्नान कर लें फिर उसके बाद आपको गोबर से एक पर्वत बनाना चाहिए। उसी को गोवर्धन माना जाता है।
इस दिन भगवान गिरिराज की आकृति के साथ, उसमें पशुओं की आकृति बनाना न भूलें। यह काफी शुभ माना जाता है।
इस दिन भगवान गिरिराज की आकृति के साथ, उसमें पशुओं की आकृति बनाना न भूलें। यह काफी शुभ माना जाता है।
गोवर्धन पर्वत तैयार करने के बाद उसके पास तेल का दीप जलाकर वहां रख दें। किसी भी पूजा में दीप जलाना बेहद शुभ माना जाता है।
इसके बाद इसके ऊपर फूल, हल्दी, चंदन, केसर और कुमकुम अर्पित करना जरूरी है। इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
गोवर्धन पूजा के दिन भगवान को अन्नकूट की मिठाई भोग में अवश्य लगाएं। फिर उसे प्रसाद के तौर पर ग्रहण करें और लोगों को कराएं।