उज्जैन मंदिर पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां पर 12 ज्योतिर्लिंगों में एक महाकाल मंदिर स्थित है। हर 12 साल में यहां पर कुंभ मेले का आयोजन किया जाता है। आइए जानते हैं कि उज्जैन मंदिर का महत्व क्या है-
भगवान शिव ने यहां दूषण नामक राक्षस का वध कर अपने भक्तों की रक्षा की थी, जिसके बाद भक्तों के निवेदन के बाद भोलेबाबा यहां विराजमान हुए थे। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से तीसरा ज्योतिर्लिंग है।
ऐसा माना जाता है कि जो भक्त उज्जैन में महाकाल का दर्शन करने से पहले बाबा काल भैरव का दर्शन करते हैं, उनके जीवन के सारे पाप मिट जाते हैं और उनकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।
ऐसा कहा जाता है कि उज्जैन मंदिर जाने से सारी मनोकामना पूरी होती है और भगवान शिव अपने भक्तों को कभी-भी निराश नहीं करते। उनके सारे दुखों को हर लेते हैं।
इस आरती को देखने के लिए पुरुषों को केवल धोती पहननी पड़ती है, वहीं महिलाओं को आरती के दौरान सिर पर घूंघट रखना पड़ता है। ऐसा माना जाता है, उस समय भगवान शिव निराकार रूप में होते हैं।
ऐसा कहा जाता है कि बाबा महाकाल को उज्जैन का राजा माना जाता है। महाकाल के नगर में कोई भी दो राजा नहीं रह सकते। ऐसा होने से रात में ठहरने वाले के हाथ से सत्ता चली जाएगी।
उज्जैन को पवित्र भूमि माना जाता है। ग्रंथों में इस स्थान को स्वर्ग की उपाधि से नवाजा गया है। यहाँ साढ़े तीन काल विराजमान है- महाकाल,काल भैरव, गढ़कालिका और अर्ध काल भैरव। यह एक मात्र ऐसा स्थान है, जहाँ शक्तिपीठ भी है, ज्योतिर्लिंग भी है, कुम्भ महापर्व का भी आयोजन किया जाता है।
यह उज्जैन मंदिर का महत्व है। एस्ट्रो से जुड़ी ऐसी ही अन्य खबरों के लिए पढ़ते रहें NAIDUNIA.COm