ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर को पुराणों में धरती का बैकुंठ बताया बताया गया है। आइए जानते हैं विश्व प्रसिद्ध मंदिर से जुड़े तथ्यों के बारे में।
पुराणों के अनुसार पुरी में स्थित इस मंदिर में भगवान विष्णु ने पुरुषोत्तम नीलमाधव के रूप में अवतार लिया था। हिंदू धर्म में यह मंदिर चार-धाम तीर्थ स्थलों में से एक है।
जगन्नाथ मंदिर के ऊपर लग झंडा हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता हैं। इस झंडे के विपरीत दिशा में लहराने का आज तक कोई वैज्ञानिक कारण पता नही लग सका है।
लगभग 45 मंजिला की बराबर की ऊँचाई वाले इस मंदिर के गुंबद पर लगा झंडा हर रोज बदला जाता है। हर दिन एक पुजारी इस ऊंचाई पर चढ़ के झंडे को बदलता है।
मुश्किल लगने वाला ये काम हर रोज इसलिए भी किया जाता हैं क्योंकि मंदिर के निर्माण से ही ऐसी परंपरा चली आ रही है। अगर यह परंपरा एक दिन भी नहीं निभाई गई तो मंदिर 19 साल तक बंद रहेगा।
मंदिर के गुंबद के ऊपर कभी भी एक पक्षी भी नहीं उड़ता है। यह विशेष क्षेत्र पक्षियों से प्रतिबंधित है, यहां तक कि हवाई जहाज को भी मंदिर के ऊपर मंडराते हुए नहीं देखा जा सकता है।
जगन्नाथ पुरी मंदिर में हर रोज 2 हजार से लेकर 2 लाख तक लोग दर्शन करने आते है। हर दिन यहां पर एक प्रसादम जिसे महाप्रसाद कहा जाता हैं। यह प्रसाद मिट्टी के बर्तन में लकड़ी पर पकाया जाता है।
जब आप सिंघा द्वार से मंदिर में पहला कदम रखते ही समुद्र के लहरों के लिए श्रवण पूरी तरह से खो जाता है। जब आप मंदिर से बाहर आते हैं तो तुरंत ध्वनि वापस आती है।