हिंदू संस्कृति में पूजा-पाठ के दौरान तिलक लगाने का विशेष महत्व है। सनातन धर्म में सिर्फ माथे पर ही नहीं, बल्कि कंठ, नाभि, पीठ और भुजाओं पर भी तिलक लगाते हैं।
सनातन धर्म में कई तरह का तिलक लगाए जाते हैं। वैष्णव, शैव और ब्रह्म तिलक का विशेष जिक्र मिलता है। यहां जानें इसका महत्व
वैष्णव तिलक भगवान विष्णु के अनुयायी लगाते हैं और यह तिलक पीले रंग के गोपी चंदन से ही लगाया जाता है। यह तिलक 'V' शेप में लगाया जाता है।
भगवान शिव के उपासक त्रिपुंड, शैव या रोली तिलक लगाते हैं। यह काले या लाल रंग का होता है। त्रिपुंड तिलक अनामिका, मध्यमा और अंगूठे के प्रयोग से लगाते हैं।
ब्रह्म तिलक मंदिर के पुजारी और ब्राह्मण लगाते हैं। साथ ही ब्रह्म देव की पूजा करने वाले गृहस्थी भी ऐसे तिलक लगाते हैं। ब्रह्म तिलक सफेद रंग की रोली से लगाया जाता है।
व्यक्ति को बिना स्नान एवं ध्यान के तिलक नहीं लगाना चाहिए। तिलक लगाने के बाद सोना भी नहीं चाहिए। खुद को तिलक हमेशा अनामिका उंगली से ही तिलक लगाएं।