हिंदू धर्म में शालिग्राम शिला का खास महत्व है। इसे भगवान विष्णु के प्रतीक के तौर पर पूजा जाता है और इसकी गिनती 24 अवतारों में होती है।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर में रामलला की मूर्ति के निर्माण के लिए नेपाल की गंडकी नदी से शालिग्राम शिला को लाया जा रहा है। इसका वजन 127 क्विंटल है।
हिमालय के रास्ते में पानी चट्टान से टकराकर इस पत्थर को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है और नेपाल के लोग इन पत्थरों को खोज कर निकालते हैं।
शालिग्राम शिला Ammonite श्रेणी का पत्थर है, जो अपने विशेष आकर्षण और भिन्न किस्म की आकृति के लिए विख्यात है। ये 33 प्रकार के होते हैं।
धार्मिक मान्यता है कि शालिग्राम शिला को पूजने से ईश्वर का आशीर्वाद मिलता है। घर में शांति और समृद्धि आती है। वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों में शालिग्राम शिला को अत्यंत शुभ माना जाता है। हिंदू धर्म की सांस्कृतिक विरासत के तौर पर इसका अपना पौराणिक महत्व है।