कुंती के सभी पुत्र महाभारत के अहम किरदार थे। शादी से पूर्व कुंती को सूर्यदेव के आशीर्वाद से भी एक पुत्र प्राप्त हुआ था। आइए जानते है कुंती को 6 पुत्र किसके आशीर्वाद से प्राप्त हुए थे।
पांडू को ऋषि से श्राप मिला था कि वह कभी भी अपने जीवन में अपनी पत्नी के साथ सहवासरत होंगे तो उनकी मृत्यु हो जाएगी। क्योंकि पांडू ने ऋषि को उनकी पत्नी के साथ सहवासरत स्थिति में मृग के रूप में मारा था।
पांडू को मिले श्राप की वजह से ही कुंती को पांचों पांडवों को मंत्र के जाप से प्राप्त करना पड़ा था। माता कुंती को उनके सभी पुत्र मंत्र के उपयोग पर मिले थे। कुंती को पांचों पांडव और कर्ण भी मंत्र के जाप से हुए थे।
कर्ण कुंती के सबसे ज्येष्ठ पुत्र थे। विवाह पूर्व कुंती ने मंत्र के जाप से सूर्य देव को प्रसन्न करके उनसे कर्ण को प्राप्त किया था। लेकिन, विवाह से पहले पुत्र की प्राप्ति होने की वजह से उन्होंने कर्ण को एक बर्तन में रखकर नदी में बहा दिया था।
युधिष्ठिर पांचों पांडवों में सबसे ज्येष्ठ थे। क्योंकि कर्ण के बारे में पांडवों को उनकी के मृत्यु के पश्चात पता चला था। युधिष्ठिर को माता कुंती ने धर्मराज के आशीर्वाद से प्राप्त किया था।
भीम गदा युद्ध में निपुण थे, अपने गदा युद्ध के कौशल के चलते उन्होंने 100 धृतराष्ट्र पुत्रों को महाभारत के रण में पराजित किया था। भीम पांडवों के दूसरे भाई थे।
अर्जुन सर्वश्रेष्ठ धनुर्धारी थे, जन्म से ही वो बेहद तेज और बुद्धिमान थे। माता कुंती ने अर्जुन को इंद्र देव के आशीर्वाद से प्राप्त किया था। महाभारत के युद्ध में अर्जुन ने जबरदस्त पराक्रम का परिचय दिया था।
नकुल और सहदेव मदरी के पुत्र थे। इन दोनों को भी कुंती ने ही मंत्रों के जाप से मादरी को दिया था। कुंती को नकुल नत्सय देव और सहदेव दर्श के आशीर्वाद से प्राप्त हुए थे।