आज हम जानेंगे कि लव मैरिज करते समय आपको किन-किन बातों का ख्याल रखना हैं?
कुंडली में कुछ योग ऐसे होते हैं जिसकी वजह से लव मैरिज में कपल्स को कई परेशानियां आती हैं। कई लोगों को प्रेम विवाह में काफी विरोध का भी सामना करना पड़ता हैं।
जन्म पत्रिका में स्पतमेश पर जब शनि और राहु ग्रह की दृष्टि पड़ती हो दो विवाहों का मौका बनता हैं। इन ग्रहों की नजर के चलते अगर व्यक्ति को प्रेम हो भी जाए तो शादी में कई अर्चनें आती हैं।
कुंडली के पांचवे स्थान पर राहु और केतू की छाया हो तब लव मैरिज का संयोग बनता हैं।इस स्थिति में जातक प्रेम को विवाह तक ले जानें में तो सफल रहता है लेकिन रिश्तेदारों और अन्य लोगों से काफी परेशानी होती है
अगर जातक की कुंडली में स्पतमेश के साथ या सप्तम भाव में राहु के बैठने से या शुक्र के साथ राहु के बैठने से भी प्रेम विवाह के योग बनते हैं।लेकिन इस योग में भागकर या व्यक्ति समाज के विपरीत जाकर शादी करते
कुंडली में ग्रहों के सेनापति मंगल यदि सप्तम भाव से संबंधित होता है तो व्यक्ति के 2-3 बार प्रेम की संभावना होती है।ऐसे लोगों के एक से अधिक संबंध भी हो सकते हैं। जिससे इनके मैरिज में इन्हें दिक्कतें आती
कुंडली में अगर लव मैरिज में कारक ग्रहों जैसे शुक्र, पंचमेश, सप्तमेश, एकादश भावों आदि के साथ यदि क्रूर व अशुभ ग्रह बैठ जाते हैं तो शादी में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
अगर आपकी कुंडली में मंगल यदि शनि या राहु से युति बना रहा हो तो लव मैरिज की संभावना होती है। दूसरी तरफ कुंडली में प्रेम के कारक ग्रह शुक्र के कमजोर होने से प्रेम विवाह और कामुक भावना भी कमजोर होती है।
प्रेम विवाह कर पाना हर किसी के लिए आसान नहीं होता हैं इसलिए लव मैरिज की दिशा में आगे बढ़ने से पहले इन बातों का आप खास ख्याल रखिए।