महाभारत में सिर्फ इन 3 शूरवीरों से पराजित हो सकते थे अर्जुन


By Prakhar Pandey08, Jan 2024 02:05 PMnaidunia.com

महाभारत का युद्ध

महाभारत का युद्ध पूरे 18 दिनों तक चला था। अर्जुन की गिनती सबसे काबिल और बेहतरीन धनुर्धारियों में होती है। आइए जानते है कौन तीन योद्धा हैं, जिनसे अर्जुन पराजित हो सकते थे?

अर्जुन का किरदार

महाभारत के युद्ध में पांडवों की विजय में अर्जुन ने सबसे महत्वपूर्ण किरदार निभाया था। अर्जुन ने युद्ध भूमि में बड़े से बड़े योद्धा को पराजित किया था।

कर्ण से मुकाबला

अर्जुन और कर्ण दोनों ही बेहद शक्तिशाली और धनुर विद्या के विद्वान योद्धा थे। अर्जुन के लिए कर्ण और कर्ण के लिए अर्जुन को हरा पाना काफी ज्यादा मुश्किल था। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार, कर्ण के भुजाओं में 100 हाथियों का बल था।

कैसे हुई थी कर्ण की पराजय?

श्री कृष्ण अर्जुन के रथ को युद्धभूमि से दूर ले आए थे। इस दौरान कर्ण भी अर्जुन का पीछा करते हुए आ गए। गुरु परशुराम के श्राप और श्री कृष्ण द्वारा कर्मों के याद दिलाएं जाने पर उन्होंने खुद ही अर्जुन के सामने शस्त्रों का त्याग कर दिया था।

भीष्म पितामह

कौरवों में श्रेष्ठ गंगापुत्र भीष्म को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। भीष्म भी एक अजेय योद्धा थे और पांडवों के पितामह भी थे। ऐसे में अर्जुन के लिए भीष्म से युद्ध करना भी आसान नहीं होने वाला था।

देवव्रत की पराजय

भीष्म की पराजय काशी नरेश अंबा की पुत्री के रूप में राजा द्रुपद के यहां जन्मी रानी सिकंदिनी के हाथों हुई थी। शिखंडनी के बाण चलाने के पश्चात भीष्म ने शस्त्रों का त्याग कर दिया था। इसके पश्चात अर्जुन ने उनपर बाणों की बरसात कर दी थी।

गुरु द्रोणाचार्य

अर्जुन गुरु द्रोणाचार्य के शिष्य थे। गुरु द्रोणाचार्य बेहद शक्तिशाली और निपुण योद्धा था, युद्धभूमि में उन्हें पराजित कर पाना किसी के लिए भी आसान नहीं होने वाला था। अर्जुन को गुरु द्रोणाचार्य ने भी युद्ध में कड़ी टक्कर दी थी।

छल से मृत्यु

गुरु द्रोण को मार पाना भी किसी के लिए आसान नहीं होने वाला था। ऐसे में गुरु द्रोण के पुत्र अश्वत्थामा की मृत्यु की खबर सुनाकर उन्हें कमजोर किया गया। बाद में द्रुपद पुत्र दृुष्टध्यूम ने गुरु द्रोण का वध कर दिया था।

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