14 अक्टूबर को महालय श्राद्धपक्ष का समापन होगा। इस दिन शनिश्वरी सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या का विशेष संयोग भी होगा। 14 अक्टूबर के दिन गजछाया योग का भी महासंयोग बन रहा है। आइए जानते है कहां होगा पर्व का पवित्र स्नान?
गजछाया योग के संयोगों में पितरों का पूजन करना कल्याणकारी बताया गया है। इस दिन त्रिवेणी संगम पर पर्व स्नान किया जाएगा। ज्योतिष के जानकारों के मुताबिक यह संयोग इससे पहले 2019 में बना था।
सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या पर शनिश्चरी का संयोग 2019 के बाद 2023 में 14 अक्टूबर को बन रहा है। अगला संयोग साल 2016 में बनेगा।
सर्वपितृमोक्ष अमावस्या पर मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के त्रिवेणी संगम पर पितरों के आशीर्वाद और शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए देशभर से श्रद्धालु उज्जैन आएंगे।
सर्वपितृ शनिश्चरी अमावस्या के दिन बन रहे योग के चलते पितरों को दिया गया श्राद्ध विशेष रूप से पितरों की तृप्ति करता है। ऐसे में इस मौके पर अन्य प्रकार से भी पितरों का श्राद्ध करना चाहिए।
पितरों के अनुकूलता और शनि की अनुकूलता के लिए इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा-अर्चना करने को विशेष मान्यता दी गई।
पीपल के पेड़ पर जल, कच्चा दूध और फिर जल अर्पित करने से पितर की तृप्त होते है। इस उपाय को करने से शनि की ढैया, साढ़े साती या महादशा का प्रभाव कम किया जा सकता है।
कुंडली में शनि को अनुकूल बनाने के लिए और उनके दुष्प्रभावों से बचने के लिए पीपल के वृक्ष की यथा पूजन करना चाहिए।