जब भी महाभारत की कथा का जिक्र होता है तो उसमें कर्ण का नाम जरूर आता है। युद्ध भूमि में उनका नाम बड़े महारथी के तौर पर जाना जाता था।
महाभारत में उल्लेख है कि कर्ण के गुरु भगवान परशुराम थे। हालांकि, उन्होंने अपने प्रिय शिष्य को एक श्राप भी दे दिया था।
महाभारत में कर्ण को महाराथी माना जाता था। हालांकि, उनकी मृत्यु के पीछे का कारण एक श्राप है, जिसके बारे में बेहद कम लोग जानते हैं।
वैसे तो करण पांडवों की मां कुंती और सूर्यदेव के पुत्र थे, लेकिन उन्हें लोग सूतपुत्र के तौर पर जानते थे। इसके पीछे कारण है कि उनका पालन पोषण एक सारथी ने किया था।
बता दें कि परशुराम केवल ब्राह्मणों को ही शिक्षा देते थे। इस वजह से कर्ण ने ब्राह्मण का वेश धारण करके उनसे शिक्षा ग्रहण की थी।
कर्ण बेहद जल्द परशुराम के प्रिय शिष्य बन गए थे। इतना ही नहीं, चीजों को सीखने की उनकी जिज्ञासा परशुराम को प्रभावित भी करती थी।
एक बार की बात है, जब वन में कर्ण के शरीर पर कीड़ा चढ़ गया था और उनके पूरे शरीर को काट लिया था। हालांकि, कर्ण ने इस वजह से कोई आवाज नहीं की, ताकि उनके गुरु की नींद खराब न हो।
भगवान परशुराम को जब कर्ण की सच्चाई के बारे में पता चला तो उन्होंने एक श्राप दे दिया। परशुराम ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर तुम अपनी सारी विद्या भूल जाओगे।