ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे धीमी रफ्तार से चलने वाला ग्रह माना जाता है। आज हम आपको बताएंगे किन राशियों पर होता हैं शनि का सबसे कम प्रभाव?
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में राशियों का काफी महत्व होता है। ज्योतिष शास्त्र में शनि की ढैया और साढ़ेसाती के समय को सबसे कठिन समय माना जाता है।
शनि की ढैया ढाई साल के लिए चलती है। शनि को 1 राशि से दूसरे राशि में जानें में ढाई साल का समय लगता है। इस दौरान राशि के लोगों को कई प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता हैं।
साढ़े साती के समय भी राशि के जातक के लिए काफी कठिन माना जाता है। शनि की साढ़ेसाती होने पर कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
साढ़ेसाती का प्रकोप ऐसा होता हैं कि अपने दुश्मन बन जाते है और व्यक्ति द्वारा लिया उसका हर निर्णय भी गलत होने लगता है।
मकर और कुंभ शनि की स्वराशि होती है। ऐसे में शनि की साढ़े साती होने पर भी इन राशियों पर ज्यादा असर नहीं पड़ता है।
इस राशि में शनि उच्च के होते हैं जिसके चलते इनके ऊपर शनि का सबसे कम प्रभाव पड़ता है। शनिदेव कर्मों के हिसाब से ही जातक को फल देते है।
कुंडली में ग्रहों पर शनिदेव की कृपा न होने की स्थिति में शनिदेव की अच्छे से पूजा करनी चाहिए। साथ ही हर शनिवार सरसों के तेल का दीपक भी जलाना चाहिए।