कालाष्टमी हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर होती है। आइए जानते है कब है कार्तिक माह की कालाष्टमी, इसका शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में।
कार्तिक माह की कालाष्टमी नवंबर में 5 तारीख को पड़ने वाली है। इस दिन भोले बाबा के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा की जाती है।
विशेष कार्य में सफलता के लिए इस लोग व्रत भी रखते है। काल भैरव देव की पूजा निशा काल में की जाती है। इस व्रत को रखने से मृत्युलोक में व्यक्ति को सभी प्रकार के सुख मिलते है।
निशा काल में कालाष्टमी पर तंत्र-मंत्र सीखने वाले लोग खास अनुष्ठान करते है। कालाष्टमी के मौके पर व्रत और सही मंशा से पूजन करने से सभी परेशानियां दूर होती हैं।
इस मौके पर ब्रह्म मेला में उठकर अपने सभी कामों से निर्वित्त होकर गंगाजल से स्नान कर लें। व्रत करने का संकल्प लें और निशा काल में काल भैरव की पूजा करें।
कालाष्टमी के मौके पर महाकाल के पूजा-अर्चना के साथ पंचोपचार करें और फल, फूल, बिल्व पत्र, धतूरा, दीप, दूध, दही, फल, धूप आदि से काल भैरव देव की पूजा करें। पूरे दिन निराहार रहे और रात में आरती के बाद फलाहार करें।
कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 नवंबर को रात में 12 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 6 नवंबर की रात 3 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। 5 नवंबर को किसी भी समय काल भैरव की पूजा की जा सकती है।
इस महीने में गंगा स्नान की परंपरा है। कार्तिक माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते है। इस माह में मंदिरों को बेहद खूबसूरत तरीके से सजाया जाता हैं।