सभी देवतागण अचानक से अपना ध्यान कुरुक्षेत्र की ओर केंद्रित करने लगे। देवों के देव महादेव की समाधि टूट गई। सब छोड़कर वो अचानक बाहर निकल पड़े।
शिव की समाधि तोड़ने के बाद पार्वती भी आश्चर्यचकित हो गईं। उन्होंने अपने परमेश्वर से पूछा कि इतने सालों से चली आ रही समाधि को आपने अचानक क्यों तोड़ा? इसका कारण बताइए।
उसपर महादेव ने उत्तर दिया कि आज पृथ्वीलोक पर एक बहुत बड़ी घटना घटने वाली है। ऐसे में इस घटना का साक्षी सभी देवी देवता बनना चाहते हैं। ये घटना जो देखने को मिलेगी, वो कभी पुण्य अर्जित करने पर भी नहीं मिलेगी।
शिव जी ने कहा कि आज स्वयं ईश्वर कुरुक्षेत्र की धरती पर उस महा ज्ञान की बरसात करने वाले हैं, जिसको सुनने से मात्र मनुष्य महामहिम की स्थिति पा सकता है।
महादेव ने आगे कहा कि गीता का ज्ञान आज खुद श्री कृष्ण अपने मुख से देने वाले हैं। ऐसे में सभी देवी देवता लोग और राजा इंद्र वहां ज्ञान अर्जित करने जा रहे हैं। पूरे ब्रह्मांड में हलचल तेज है। देवी आप मानव इतिहास में ऐसा होने वाला है जो आज तक नहीं हुआ।
इस प्रकार से श्रीकृष्ण का उपदेश चालू हुआ था। ब्रह्मा जागे, विष्णु जागे और त्रिभुवन में कौतूहल जागा। चारों दिशाओं सचेत हुई, धरती पर सभी का ध्यान भागा। गीता का यह ज्ञान श्रवण को शिव जी ने ध्यान समाधि से त्याग था। यह महाभारत का दिल दहला देने वाली घटना थी।
तीनों लोकों में यह बात आग की तरह फैल गई, तो बहुत सारे देवी देवता वहां पहुंच गए। सब लोग गीता का उपदेश लेने के लिए व्याकुल थे। मानव के कल्याण के लिए धरती पर एक ऐसा अस्त्र जा रहा है जो युगों-युगों तक पढ़ा जाएगा।
इस लेख में दी गई सभी जानकारियां एक सामान्य मान्यताओं पर आधारित है जिसकी हम अपनी तरफ से कोई भी पुष्टि नहीं करते हैं।