मरने के बाद तेरहवीं क्यों की जाती है?


By Arbaaj28, Nov 2024 05:22 PMnaidunia.com

हिंदू धर्म में व्यक्ति के मरने के बाद तेरहवीं मनाने की प्रथा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मरने के बाद तेरहवीं क्यों की जाती है?

मरने के बाद तेरहवीं

हिंदू धर्म के अनुसार जब कोई मरता है, तो उसके मरने के 13 दिनों बाद कुछ काम किए जाते हैं, जिसे तेरहवीं के नाम से जाना जाता है।

आत्मा का वास

गरुड़ पुराण के अनुसार, जब व्यक्ति व्यक्ति मारता है, तो वो घर में 13 दिनों तक वास करते है। उसके बाद ही घर को छोड़ता है इसलिए तेरहवीं करने की प्रथा है।

आत्मा को मुक्ति

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तेरहवीं करने के बाद ही आत्मा को मुक्ति मिलती है और भगवान का धाम प्राप्त होता है।

तेरहवीं पर पिंडदान

आत्मा अपने परिवार वालों के द्वारा किए जाने वाले कामों को ध्यान से देखती है। पिंडदान से आत्मा को बल मिलता है और वह मृत्युलोक से यमलोक तक की यात्रा संपन्न करती है।

ब्राहमण भोज है जरूरी

तेरहवीं में ब्राहमण भोज भी जरूरी माना गया है, क्योंकि ब्राह्मणों द्वारा सब क्रिया कराई जाती है। ऐसे में अगर ब्राह्मण भोज न करवाया जाए, तो मृतक की आत्मा पर ब्राह्मणों का कर्ज चढ़ जाता है।

डिस्क्लेमर

लेख में दी गई सभी जानकारियां सामान्य मान्यताओं पर आधारित है जिसकी हम अपनी तरफ से कोई भी पुष्टि नहीं करते हैं।

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