पूजा घर में किया जाए या मंदिर में, घंटी बजाना अनिवार्य होता है। बिना घंटी बजाए कोई भी पूजा सफल नहीं होती है। सुबह भगवान को नींद से जागने के लिए यह बजाया जाता है।
भगवान को पूजा के बाद प्रसाद का भोग लगाते समय भी घंटी बजाना अनिवार्य होता है। आखिर ऐसा नियम क्यों है? आइए हम आपको बताते हैं।
पौराणिक ग्रंथों के हिसाब से भगवान के पूजा में जगाने के लिए भी घंटी बजाई जाती है। ऐसा करने से भगवान जल्द ही नींद से जाग जाते हैं।
वायु के पांच मुख्य तत्व हैं, जिसमें व्यान वायु, उड़ान वायु, समान वायु, अपान वायु और प्राण वायु होते हैं। भगवान को नैवेद्य अर्पित करते समय घंटी बजाई जाती है।
वायु के 5 तत्वों के लिए भी घंटी बजाई जाती है और भोग लगाया जाता है। पांच बार घंटी बजाकर भगवान को वायु तत्व से जगाया जाता है।
भगवान को अर्पित करने के लिए अन्न, जल, मेवा, मिष्ठान और फल को नैवेद्य बोला जाता है। नैवेद्य पान के पत्ते के ऊपर रखकर भोग लगाई जाती है।
पान के पत्ते की उत्पत्ति समुद्र मंथन के दौरान अमृत बूंद से हुई थी। यही कारण है कि पान के पत्ते से देवी देवता प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं।
इस लेख में दी गई सभी जानकारियां एक सामान्य मान्यताओं पर आधारित है जिसकी हम अपनी तरफ से कोई भी पुष्टि नहीं करते हैं।