शादी का रिश्ता सिर्फ दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो परिवारों का भी होता है। आइए जानते है शादी के बाद बेटियों के विदा होने की बड़ी वजहों के बारे में।
शादी में निभाई जाने वाले कई रीति-रिवाजों में सबसे महत्वपूर्ण होता है, लड़की के विदाई का रिवाज है। हर रिवाजों में इस रिवाज का भी खास महत्व होता है।
शादी के बाद लड़की अपने मां-बाप से विदा लेकर दूसरे घर यानी अपने ससुराल को जाती है। ससुराल ही लड़की का नया घर बन जाता है।
खासकर नॉर्थ ईस्ट के पहाड़ी इलाकों में विवाह के बाद लड़के भी विदा होते है। वहीं भारत के हर स्थान, हर धर्म और हर प्रांत में लड़कियां ही विदा हुआ करती है।
विदाई के रिवाज के पीछे त्रिदेवों का मत था। सृष्टि के बाद शतरूपा और मनु पृथ्वी पर आए थे। यह दोनों स्त्री-पुरुष बनकर आए थे। थोड़े समय बाद विवाह और परंपराओं से जुड़ी चीजों को लेकर मंत्रणा होने लगी।
ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समक्ष यह प्रश्न था कि स्त्री और पुरुष में से किसे शादी के बाद अपना घर छोड़ना होगा। तब विष्णु और भगवान शिव ने उत्तर देते हुए स्त्री की विदाई की रीति सुझाई दी।
भगवान महेश के अनुसार, स्त्री शक्ति के बिना पुरुष कुछ भी नहीं है और अपनी-अपनी पत्नियों के कारण ही पुरुष पूर्ण होते है।
स्त्री में शक्ति संपत्ति और सौम्या होती है, जिससे वह दोनों घरों(मायका और ससुराल) को संभाल सकती है। एक स्त्री जब घर को सुख-संपदा से भर देती है, फिर ही वे जीवन में एक बार उस घर को छोड़ अन्य घर में प्रवेश करती है।