ईद उल अजहा क्यों मनाते हैं मुस्लिम?


By Arbaaj13, Jun 2024 03:00 PMnaidunia.com

ईद उल अजहा इस्लाम धर्म का दूसरा सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है। इस त्योहार को भारत में बकरा ईद के नाम से भी जाना जाता है। कुर्बानी की प्रथा हजरत इब्राहिम से संबंध रखती हैं, तो कैसे मुसलमान मनाते है? आइए इसके बारे में जानते हैं।

कुर्बानी की प्रथा

अक्सर लोगों को लगता हैं कि कुर्बानी देने की प्रथा मुसलमानों की है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। दरअसल, कुर्बानी की प्रथा का संबंध अल्लाह के पैगंबर हजरत इब्राहिम से जुड़ी हैं, जो हजरत मुहम्मद से कई सदियों पहले दुनिया में आए थे।

प्यारे चीज की कुर्बानी

हजरत इब्राहिम को एक रात सपने में अल्लाह उनसे उनकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांगते हैं, जिसके बाद हजरत इब्राहिम अपने बेटे हजरत इस्माइल को कुर्बान करने का इरादा करते हैं।

80 साल बाद हुआ था बेट

हजरत इब्राहिम के नजदीक उनके लिए सबसे प्रिय उनका बेटा हजरत इस्माइल होते है, क्योंकि उनका जन्म लगभग 80 सालों बाद हुआ था।

हजरत इस्माइल की जगह आया दुंबा

हजरत इब्राहिम जब अपने बेटे की कुर्बानी देने जाते है, तो आंखों पर पट्टी बांध लेते है और जब चाकू चलाते है, तो बेटे की जगह अल्लाह दुंबा( भेड़) भेज देते हैं। हजरत इब्राहिम जब आंखों से पट्टी हटाते हैं, तो बेटा बगल में खड़ा होता है और दुंबा जबहा हो जाता है।

इब्राहिम की सुन्नत मानते हैं मुस्लिम

इस्लामिक हदीस के अनुसार, जब मुस्लिम धर्म के मानने वाले पैगंबर मुहम्मद से पूछते हैं कि हम कुर्बानी क्यों दें, तो पैगंबर मुहम्मद कहते हैं- ये लोगों कुर्बानी तुम्हारे बाप इब्राहिम की सुन्नत हैं।

ईद उल अजहा

हजरत इब्राहिम की सुन्नत को अदा करने को इस्लाम में ईद उल अजहा के नाम से जाना जाता है। कुर्बानी का संबंध हजरत इब्राहिम से हैं, अल्लाह के पैगंबर थे।

कब होगा भारत में ईद उल अजहा?

ईद उल अजहा का त्योहार भारत में इस साल 17 जून को मनाया जाएगा। इस त्योहार में किसी तरह का कंफ्यूजन नहीं होता है, क्योंकि 10 जिल-हिज्जा हो मनाया जाता है।

हजरत इब्राहिम की सुन्नत को अदा करने के लिए मुस्लिम कुर्बानी का त्योहार मनाते हैं। धर्म और आध्यात्म से जुड़ी खबरों को पढ़ने के लिए जुड़े रहें naidunia.com के साथ

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