रावण ने श्रीराम से दोस्ती के बजाय क्यों चुना युद्ध?


By Prakhar Pandey23, Oct 2023 05:01 PMnaidunia.com

रावण और राम

राम और रावण के बिना रामायण लिखी ही नहीं जा सकती है। आज हम आपको बताएंगे कि आखिर क्यों रावण ने श्रीराम से मित्रता के बजाय युद्ध को चुना था।

रामायण

रामायण के मुताबिक, रावण द्वारा सीता जी का छल के साथ अपहरण करने की वजह से ही रावण और प्रभु श्रीराम के बीच भयंकर युद्ध हुआ था।

सीता हरण

सीता हरण के बाद भी प्रभु श्रीराम ने अपने कई दूतों से रावण के पास शांति और मित्रता का संदेश भेजा था। लेकिन रावण ने उनकी एक न सुनी।

क्यों नहीं की मित्रता?

रावण ने प्रभु श्रीराम के मित्रता और शांति के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। प्रभु श्रीराम शुरू से ही यह चाहते थे कि रावण उन्हें सीता मां लौटा दें और वो अयोध्या लौट जाएं।

स्वाभिमान की बात

रावण के लिए युद्ध भूमि छोड़ना उसके स्वाभिमान के विरुद्ध था। इसलिए रावण ने कुंभकरण और मेघनाथ जैसे वीर सिपाहियों की मृत्यु के बाद भी रण नहीं छोड़ा था।

भगवान थे सामने

रावण को परम ज्ञानी कहा जाता है। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार रावण को यह पता था कि सामने भगवान है। लेकिन इसके बावजूद भी वह अपने घमंड के चलते पीछे नहीं हटा।

युद्धभूमि

युद्ध भूमि में जब रावण का सामना भगवान श्रीराम से हुआ तो वह समझ गया था कि इस युद्ध में उसका हार निश्चित हैं। लेकिन इसके बावजूद वह डट के लड़ा।

रावण की हार

रावण की हार के साथ ही उसका घमंड भी चकनाचूर हो गया था। धार्मिक शास्त्रों में लिखी यह बात कि रावण की लंका हनुमान जी ने नहीं बल्कि उसके घमंड ने जलाई थी। यह बात सही साबित होती नजर आई।

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