वॉशिंगटन। यदि आप गूगल पर सर्च करेंगे कि दुनिया का सबसे खुशमिजाज व्‍यक्‍ित कौन है, तो मैथ्‍यू रिकार्ड का नाम सबसे ऊपर दिखाई देगा। वह तिब्‍बत के रहने वाले बौद्ध भिक्षु हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ विसकॉन्सिन के न्‍यूरोसाइंटिस्‍ट ने 12 साल उनके दिमाग का उस वक्‍त अध्‍ययन किया, जब वह ध्‍यान में होते हैं। डेविडसन ने मैथ्‍यू के सिर पर 256 सेंसर्स लगाए थे और पाया कि जब वह ध्‍यान लगा रहे होते हैं, तो उनके दिमाग में असमान्‍य रूप से प्रकाश दिखाई देता है।

डेविडसन ने बताया कि स्‍कैन में दिखा कि मैथ्‍यू जब मैडिटेशन कर रहे होते हैं, तब उनके दिमाग में गामा किरणों पैदा होती हैं। इनका संबंध, चेतना, सीखने और याददाश्‍त से है और इनके बारे में न्‍यूरोसाइंस लिट्रेचर में पहले कभी जिक्र नहीं किया गया है।

स्‍कैन में यह भी पता चला कि उनके दिमाग के बाएं प्रीफंटल कॉर्टेक्‍स में दाएं भाग की तुलना में अधिक गतिविधि हो रही थी। इसके चलते उनमें असमान्‍य रूप से खुशमिजाजी की क्षमता अधिक और नकारात्‍मकता की प्रवृत्‍ित कम थी। मैथ्यू कई बार पूरे-पूरे दिन ध्‍यान में ही गुजार देते हैं।

वह खुशमिजाज रहने की सलाह देते हुए कहते हैं कि 'मैं, मैं और मैं' के बारे में सोचना बंद कर दें। वह कहते हैं कि हमेशा अपने बारे में सोचते रहना, और हमेशा यह सोचते रहना कि आप अपने लिए चीजों को कैसे बेहतर बना सकते हैं, यह थका देने वाला। इससे तनाव होता है और जो अंत में आपको दुख की ओर ले जाता है।

वह कहते हैं कि यदि आपको खुश रहना है, तो आपको अधिक दयालु बनना होगा। इससे न सिर्फ आप बेहतर महसूस करेंगे, बल्कि अन्‍य लोगों को भी इससे अच्‍छा लगेगा।

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