बैंकॉक। भारत की पाकिस्तान पर बड़ी कूटनीतिक जीत हुई है। थाईलैंड की एक आपराधिक अदालत ने दाऊद इब्राहिम के गुर्गे मुन्ना झिंगड़ा को लेकर आदेश दिय़ा है कि वो पाकिस्तानी नहीं बल्कि भारत का नागरिक है। इसके बाद उसे भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है।

अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि, सैयद मुदस्सर हुसैन उर्फ 'मुन्ना झिंगड़ा' भारतीय नागरिक है। ये कहते हुए अदालत ने उसे स्वदेश भेजने का आदेश दिया। मुन्ना झिंगड़ा फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट के सहारे बैंकॉक पहुंचा था। जहां वो दाऊद के सबसे बड़े दुश्मन छोटा राजन की हत्या की कोशिश के मामले में साल 2000 से जेल में बंद है।

झिंगड़ा का पिता मुदस्सर नुसैन का भी 1993 के मुंबई धमाकों से नाम जुड़ा है। ऐसा कहा जाता है कि उसके संबंध आईएसआई से भी थे। इसी वजह से पाकिस्तान कूटनीतिक जरियों से भी उसकी सजा कम कराने की कोशिशों में जुटा हुआ था। इसी का नतीजा था कि पाकिस्तानी दूतावास दो बार उसे शाही क्षमादान दिलाने में कामयाब रहा और उसकी सजा घटकर 34 साल हो गई।

इसके बाद थाईलैंड में पाकिस्तानी मिशन दो बार और उसे क्षमादान दिलाने में सफल रहा। इसके बाद 2016 में मुन्ना की सजा घटकर 18 साल हो गई।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब फैसला आते ही झिंगड़ा का व्यवहार आक्रामक हो गया और वो जज को ही गालियां देने लगा। वहीं पाकिस्तानी दूतावास के अफसरों का व्यवहार भी काफी आक्रामक रहा।

इस फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए पाकिस्तान के पास तीस दिन की मोहलत है। ऐसा नहीं करने पर भारत 90 दिन के भीतर दाऊद के इस गुर्गे को वतन ला सकेगा।

अदालत का फैसला भारत के लिए राहत की खबर है। दरअसल, झिंगड़ा की नागरिकता को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच काफी लंबे समय से विवाद है। एक तरफ भारत मुन्ना झिंगड़ा को अपना नागरिक बताता रहा है। तो दूसरी तरफ पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान उसे मोहम्मद सलीम बताते हुए अपना नागरिक होने का दावा करता रहा है।

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