जंगली हाथियों का एक झुंड चीन के शहर कुन्मिंग के आसपास घूम रहा है। ये हाथी अपने घर से लगभग 482 किलोमीटर की दूरी तय कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इनके मकसद का पता नहीं चला है। इन हाथियों को ट्रैक करने वाले अधिकारी भी परेशान हैं। जिनके ऊपर इन्हें शहर से बाहर रखने की जिम्मेदारी है। हाथियों के इस झुंड में कुछ बड़े हाथी हैं और कुछ छोटे बच्चे भी शामिल हैं।

ह्यूस्टन पब्लिक मीडिया की खबर के अनुसार हाथियों के इस झुंड को अपने घर से निकले एक साल से ज्यादा समय हो चुका है। ये हाथी म्यांमार बॉर्डर के पास बने रिजर्व में रहते थे। अपने रास्ते में इन हाथियों ने जंगलों और नदियों को पार करते हुए गांवों और खेत पहुंचे हैं। इस दौरान फसलों को काफी नुकसान हुआ है। एक युवा हाथी ने इस दौरान सड़ा हुआ अनाज भी सूंघ लिया जो शराब बनाने के लिए रखा था। इसके बाद इस हाथी ने नशे की हालत में काफी उत्पात मचाया था।

सैकड़ों लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया

अधिकारियों ने सैकड़ों लोगों को सुरक्षित जगह पर भेजकर हाथियों की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे लगा दिए हैं। हाथियों को शहर से बाहर रखने के लिए उनके रास्ते में फल और सब्जी रखी जा रही है। साथ ही कई बैरियर भी लगाए गए हैं। अकेले कन्मिंग में ही 7 मिलियन से ज्यादा लोग रहते हैं। हाथियों को इस आबादी से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।

क्यों भटक रहा है हाथियों का यह झुंड

एक्सपर्ट का मानना है कि हाथियों ने संसाधनों की खोज में अपना घर छोड़ा है और अब उपयुक्त जगह मिलने पर वहीं रुक जाएंगे। हाथियों के एक जानकार ने बताया कि ये हाथी सुरक्षा, जीविका और सेक्स के लिए बेहतर वातावरण की तलाश में निकले हैं। उन्होंने आगे कहा "हाथी खतरे से बचने के लिए पलायन करते हैं। वो खाने और पानी की तलाश में घर से बाहर निकलते हैं। वो सामाजिक कारणों से और प्रजनन के लिए भी पलायन करते हैं।"

ज्यादा जनसंख्या हो सकती है समस्या

हाथियों का यह झुंड चीन के ज़िशुआंगबन्ना इलाके में रहता था, जहां सरकार ने दो आरक्षित पार्क हाथियों के लिए बना रखे हैं। यहां फिलहाल 280 हाथी रह रहे हैं। हाथियों की बढ़ती जनसंख्या भी उनके पलायन का कारण हो सकती है। केन्या में हाथियों के बारे में रिसर्च कर रहे विटमेयर ने कहा "ज्यादा जनसंख्या होने पर बेहतर खाने, पानी और आवास के लिए पलायन करना हाथियों के लिए आम बात है। क्योंकी जब आप बहुत सारे लोगों के बीच रहते हैं तो आपको संसाधनों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।"

इंसानी अतिक्रमण भी हो सकता है पलायन की वजह

हाथियों के निवास में इंसानों का अतिक्रमण ही उनके पलायन की वजह हो सकता है। एक अन्य एक्सपर्ट जिन्होंने इन हाथियों के झुंड पर रिसर्च भी की है। उनका कहना है कि हाथी एक खास तरह के आवास में ही रहते हैं। उन्हें बड़ा होने के लिए खास तरह के संसाधनों की जरूरत पड़ती है। इंसानों ने उनके आवास के साथ काफी छेड़छाड़ की है। शायद इस वजह से वो अब वहां नहीं रह सकते और सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा करके अपने लिए सही आवास खोज रहे हैं।

नहीं मिल रहा सही आवास

हाथियों का यह झुंड इतने लंबे समय से क्यों चल रहा है। इसके बारे में भी कुछ पता नहीं चला है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों को अभी तक सही आवास नहीं मिला है। इस वजह से वो अभी तक चलते जा रहे हैं। चीनी मीडिया हाउस चैक्सिन का कहना है कि पिछले कुछ समय में इंसान और हाथी जरूरत से ज्यादा एक दूसरे के संपर्क में रहे हैं और हाथियों के आवास पर इंसानों का अतिक्रमण बढ़ा है। वन विभाग से जुड़े एक अफसर का कहना है कि हाथी लंबे समये से रिजर्व से बाहर हैं और उससे दूर ही जा रहे हैं। उनके इस पलायन को समझना मुश्किल होता जा रहा है।

अभी तक इंसानों को नहीं पहुंचाया नुकसान

हाथियों के इस झुंड ने आर्थिक नुकसान पहुंचाया है, पर इंसानों को अभी तक इनसे ज्यादा परेशानी नहीं हुई है। लेकिन, जैसे-जैसे ये झुंड आबादी वाले इलाकों में जाएगा। इसकी आशंका बढ़ती जाएगी। मौजूदा हालातों में कभी भी ऐसी खबर आ सकती है। ये हाथी कहां तक घूम सकते हैं इसका इलाका भी सीमित है। पर्यावरण के एक जानकार के अनुसार यदि ये हाथी उत्तर की दिशा में और पलायन करते हैं तो मौसम उनके अनुकूल नहीं रहेगा और वो वहां ज्यादा समय तक जिंदा नहीं रह पाएंगे।

हाथियों के मकसद का पता लगाना जरूरी

प्रशासन ने कुछ लोगों को सुरक्षित जगहों में पहुंचाया है और वैज्ञानिक हाथियों के झुंड का मकसद पता करने में जुटे हुए हैं। एक्सपर्ट के अनुसार सबसे बेहतर यही होगा कि हाथियों को उनकी मनपसंद कोई जगह मिल जाए। जहां उनके लिए पर्याप्त संसाधन हों। इसके साथ ही जहां इंसान और हाथी एक दूसरे से सुरक्षित रहें। उन्हें वापस उनके घर में छोड़ देना एक विकल्प हो सकता है पर इसके लिए उनके उद्देश्य का पता लगाना जरूरी है। क्योंकि फिर से अपने घर पहुंचने पर अगर हाथियों की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वो फिर से अपना घर छोड़ देंगे।

Posted By: Arvind Dubey

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