वाशिंगटन। अफगान शांति वार्ता में सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन एक अमेरीकी सेनिक की शहादत तालिबान के अरमानों पर पानी फेर दिया। पिछले गुरुवार यानी पांच सितंबर को काबुल स्थित अमेरिकी दूतावास के पास तालिबान ने विस्फोटकों से लदी कार को उड़ा दिया था।

काबुल में एक हफ्ते के भीतर तालिबान का यह दूसरा बड़ा आतंकी हमला था। इस हमले में 10 अफगान नागरिकों के साथ एक अमेरिकी सैनिक सार्जेंट बैरेटो ऑर्टिज की भी मौत हो गई थी। तीसरी बार अफगानिस्तान में तैनात किए गए 34 साल के बैरेटो की मौत से नाराज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले तो तालिबान के साथ कैंप डेविड में होने वाली गोपनीय बैठक रद्द की। बाद में उन्होंने तालिबान से पूरी तरह वार्ता खत्म करने का एलान कर दिया।

सार्जेंट बैरेटो को करीब से जानने वाले बताते हैं कि उनको केवल दो चीजों से प्यार था। एक उनका परिवार और दूसरा सेना और देश। प्यूर्टोरिको में पले-बढ़े बैरेटो के पिता भी सेना में थे। बैरेटो 2010 में सेना में शामिल हुए थे। अफगानिस्तान में गुप्त ऑपरेशन कर रही विशेष टीम का हिस्सा रहे बैरेटो गुरुवार को अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के ऑफिस के करीब स्थित चेक प्वाइंट पर पहुंचे थे कि तभी वहां जोरदार धमाका हुआ और वह उसकी चपेट में आ गए।

बैरेटो की पत्नी लेग्ना एपोंते ने कहा, 'बैरेटो के पिता ने बहुत ही गर्व के साथ देश की सेवा की। वह भी अपने पिता की तरह ही बनना चाहते थे। वह अपने देश को बहुत प्यार करते थे और उसकी सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात थी।' उनके एक साथी सार्जेंट सेइक ने कहा कि बैरेटो बहुत ही सकारात्मक और महान शख्सियत थे।

Posted By: Yogendra Sharma

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