लंदन। कार दुर्घटनाओं के कई मामलों में देखा गया है कि हादसे की प्रमुख वजह ड्राइवर को नींद आना था। मगर, अब कार चलाते हुए नींद आने पर हादसे नहीं होंगे। दरअसल, इसे रोकने के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी सिस्टम कारों में लगाया जा रहा है, जो ड्राइवर्स की आखों को ट्रैक करेगा। जब उन्हें नींद आने का झोंका आने का खतरा ज्यादा होगा, तो यह सिस्टम अलार्म बजा देगा। पांच साल के भीतर सभी कारों में इस सिस्टम का लगा होना अनिवार्य होगा।

समय से आगे की यह अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी हर साल सड़क पर होने वाली सैकड़ों मौतों को कम कर सकती है। हालांकि, यह टेक्नोलॉजी पहले से ही कुछ निर्माताओं की कारों में उपलब्ध है, लेकिन अगले पांच साल के अंदर इसे हर कार में अनिवार्य किया जाएगा। इसमें लगा मॉनीटरिंग सिस्टम यह मापता है कि कितने समय के लिए ड्राइवर की आंख पलकें झपकाते हुए बंद रहती हैं।


यदि वे नींद की गिरफ्त में आते हुए दिखाई देते हैं, तो यह सिस्टम एक चेतावनी देकर उन्हें ब्रेक लेने के लिए अलर्ट साउंड बजाता है। सबसे उन्नत संस्करणों में यदि इस चेतावनी को नजरअंदाज किया जाता है, तो एक कार इमरजेंसी स्टेट में चली जाती है और अपनी गति को खुद-ब-खुद कम कर लेती है। इसके साथ ही कॉल सेंटर को एक मैसेज भेजा जाता है, जिसमें अनुरोध किया जाएगा कि ड्राइवर को एक फोन कॉल किया जाए।

यदि ड्राइवर तब भी जवाब नहीं देता है, तो एक आपातकालीन स्टॉप को सक्रिय किया जा सकता है। ऑन-कॉल सिस्टम लाइन पर रहने और जरूरत पड़ने पर आगे की मदद भेजता है। यूरोपीय संसद ने ऐसे नियम लाए हैं, जो मई 2022 से बाजार में आने वाली कारों के सभी नए मॉडल में सिस्टम को अनिवार्य बनाने के लिए लगभग निश्चित हैं। मई 2024 से सभी नई कारों में इस सिस्टम को लगाना होगा।

ब्रेक्जिट से इतर, इस तकनीक को यूके की कारों में भी लागू किया जाएगा। ब्रिटेन में इसे अनिवार्य किया जाना चाहिए या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय सरकार बाद में करेगी। सड़क दुर्घटना के आंकड़े बताते हैं कि साल 2017 में यूके में कार चलाते हुए नींद आने की वजह से 53 घातक सड़क दुर्घटनाएं हुईं और 351 गंभीर हादसे हुए थे।

हालांकि, यह व्यापक रूप से स्वीकार किया जाता है कि थकान से संबंधित दुर्घटनाओं के लिए सही आंकड़ा इस तरह के हादसों में सही तरीके से दर्ज नहीं होता है। लिहाजा, उनकी संख्या काफी अधिक हो सकती है। अनुमान है कि पिछले साल कार चलाते हुए ड्राइवरों को नींद आने की वजह से लगभग 400 सड़क हादसे हुए हैं, जिनमें करीब 1,770 मौतें हुईं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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