वॉशिंगटन। कोरोना के बढ़ते मामलों को कोई भी देश पूरी तरह खत्म नहीं कर पाया है। डॉक्टर और चिकित्सा क्षेत्र के जानकार बताते हैं कि जब तक इस वायरस का वैक्सीन नहीं बन जाता है, इस महामारी को पूरी तरह से खत्म करना नामुमकिन होगा। दुनियाभर की सभी दिग्ग्ज फार्मा कंपनियां कोरोना की दवा और वैक्सीन विकसित करने की दिशा में काम कर रही हैं। फिलहाल अमेरिका ने रेमेडिजिवेर (remdesivir) नाम की दवा को Covid-19 के इलाज के लिए स्वीकृत किया है।

इसके अलावा, भारत से अमेरिका ने हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन नाम की दवा भी खरीदी है। इस बीच, प्रभावी साबित होने से पहले ही अमेरिका ने ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका से 30 करोड़ वैक्सीन खरीदने का सौदा कर लिया है। अभी तक कोई भी टीका कोरोना वायरस पर पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हो पाया है। बताया जा रहा है कि अमेरिका ने एस्ट्राजेनेका से 1.2 अरब डॉलर (करीब 9,000 करोड़ रुपए) में यह सौदा तय हुआ है।

अमेरिका के स्वास्थ्य मंत्री एलेक्स अजार ने इस सौदे को बहुत अहम बताया है। उन्होंने कहा कि इससे साल 2021 तक टीके की प्रभावी उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इस टीके को यूनिवर्सिंटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने विकसित किया है और एस्ट्राजेनेका ने इसका लाइसेंस लिया है। हालांकि, अभी कोविड-19 का कारण बनने वाले कोरोना वायरस पर इसका प्रभाव प्रमाणित नहीं हुआ है।

बताया जा रहा है कि इस सौदे के तहत अमेरिका क्लीनिकल ट्रायल के तीसरे चरण के लिए अपने यहां 30,000 लोगों पर इसका परीक्षण कराएगा। इस टीके का नाम एजेडडी 1222 है और इसके पहले व दूसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल की शुरुआत पिछले महीने हुई है। इसमें 18 से 55 साल की उम्र के 1,000 से ज्यादा स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai

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