वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की तेल कंपनी पर सप्ताहांत हुए हमलों को जिक्र करते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका तेल का इतना बड़ा निर्माता बन गया है कि अब उसे मध्य पूर्व से तेल खरीदने की जरूरत नहीं है। यह बात उन्होंने एक ट्वीट में कही। हालांकि, अमेरिकी सरकार का डेटा एक अलग कहानी बयान करता है। एक दशक से अधिक समय पहले शुरू की गई प्रौद्योगिकी आधारित अमेरिकी ड्रिलिंग बूम ने संयुक्त राज्य अमेरिका को एक बड़े पैमाने पर निर्माता बना दिया है।

मगर, पिछले साल खाड़ी क्षेत्र से कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का बहुतायत में आयात किया गया था। अटलांटिक काउंसिल ग्लोबल एनर्जी सेंटर के एक सीनियर फेलो जीन फ्रेंकोइस ने बताया कि हम अभी भी थोड़ा बहुत आयात कर रहे हैं और विश्व बाजार से पूरी तरह से अछूते नहीं हैं।

बताते चलें कि सऊदी के तेल प्लांट पर हुए हमले के बाद वहां का करीब आधा उत्पादन प्रभावित हुआ है। सोमवार को ही कच्चे तेल की कीमत में 10 फीसद की इजाफा दर्ज किया गया था। इस हमले की जिम्मेदारी ईरान समर्थित यमन के हौती विद्रोहियों ने ली है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि ईरान ने इससे साफ इंकार किया है।

सऊदी अरब दुनिया का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है, जो दुनिया भर में रोजाना लगभग 70 लाख बैरल कच्चे तेल का निर्यात करता है। संयुक्त राज्य अमेरिका रोजाना करीब 120 लाख बैरल का उत्पादन करता है, जबकि खपत 200 लाख बैरल की है। इसका अर्थ है कि ईरान को बाकी तेल को आयात करता है।

तेल की मांग और आपूर्ति में इस कमी का एक बड़ा हिस्सा कनाडा से आने वाले क्रूड से पूरा होता है। वहीं, कुछ हिस्सा अभी भी सऊदी अरब, इराक और अन्य खाड़ी देशों से तेल मंगवाकर पूरा किया जाता है क्योंकि कई अमेरिकी रिफाइनरियां उनके तेल को पसंद करती हैं। उदाहरण के रूप में टेक्सास की सबसे बड़ी अमेरिकी रिफाइनरी मोटिविया एंटरप्राइजेज एलएलसी में सऊदी अरब की सरकारी ऊर्जा कंपनी सऊदी अरामको का आधा स्वामित्व में है और यह सऊदी ग्रेड के लिए स्थापित है। अन्य रिफाइनरियों में विशेष रूप से कैलिफोर्निया में बड़े अमेरिकी तेल क्षेत्रों से अलग किया गया है और यह भी कार्गो पर निर्भर होना चाहिए।