वॉशिंगटन। User Data Privacy पर तकनीकी दिग्गज कंपनी एपल ने एक खास संदेश दिया है। निजता एक मूलभूत अधिकार है, जिसकी वकालत तकनीकी दिग्गज कंपनी एपल और इसके सीईओ टिम कुक हमेशा करते रहे हैं। अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों गूगल और फेसबुक की तुलना में एपल ने यूजर के डेटा, अपने प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल होने वाले एप्स को इजाजत देने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। इसके साथ ही कंपनी ने निजता को लेकर पारदर्शी दृष्टिकोण रखा है। उस छवि को बनाए रखने और उपयोगकर्ताओं को अधिक जागरूक बनाने के लिए, एपल ने अपनी प्राइवेसी वेबसाइट को अपडेट किया है।

एपल के अनुसार, उदाहरण के लिए सफारी दोगुनी मेहनत करती है, ताकि विज्ञापनदाताओं को वेब पर आपके आस-पास आने से रोक सके। आईओएस 13 सॉफ्टवेयर पर चलने वाले आईफोन पर यूजर्स का लोकेशन डाटा पर अधिक नियंत्रण है, जिसे वे एप डेवलपर्स के साथ साझा करना चाहते हैं। यूजर्स एक नए विकल्प के साथ एप्स की लोकेशन डाटा की एक्सेस को नियंत्रित कर सकते हैं। वे खुद तय कर सकते हैं कि क्या उन्हें हर बार ऐप के इस्तेमाल के दौरान इसे देना है या नहीं। यह सुविधा अभी तक एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर अभी तक मौजूद नहीं है।

एपल यह भी चाहता है कि उसके यूजर्स को अच्छी तरह से पता हो कि एपल किस तरह का डाटा स्टोर करता है। कंपनी ने कहा कि उदाहरण के लिए आईफोन के हेल्थ ऐप को ही ले लीजिए, जिसमें महिलाओं के लिए साइकिल ट्रैकिंग का फीचर दिया गया है और निश्चित रूप से इसमें कई संवेदनशील जानकारियां होंगी। एपल ने कहा कि साइकिल ट्रैकिंग सहित सभी डाटा डिवाइस में इन्क्रिप्टेड (कोई उस डाटा को हासिल नहीं कर सकता है) रहता है और यदि आई-क्लाउड बैकअप को इनैबल कर दिया गया है, तो डाटा वहां बी इन्क्रिप्टेड ही रहता है। एपल आई-क्लाउड पर एंड टू एंड इन्क्रिप्शन का इस्तेमाल करता है, जिसका मतलब है कि कंपनी भी उस डाटा को हासिल नहीं कर सकती है।

जब बात मैप्स की आती है, तो डाटा एपल आईडी के साथ जुड़ा नहीं होता है और यह डिवाइस पर केंद्रित रहता है। यानी एपल की तरफ से अपने यूजर्स और प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के लिए संदेश काफी स्पष्ट है- आप अपने अनुभवों से क्या साझा करते हैं और किससे साझा करते हैं, यह आपके ऊपर ही निर्भर करता है। हम एपल के उत्पादों को आपकी निजता की सुरक्षा के लिए डिजाइन करते हैं और आपकी जानकारियों पर आपको नियंत्रण देते हैं।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai