नई दिल्ली। कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान एक बार फिर दुनिया में अलग-थलग पड़ता नजर आ रहा है। आर्टिकल 370 हटाने के बाद से पड़ोसी देश बहुत हल्ला मचा रहा है, लेकिन किसी बड़े देश ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है। पाकिस्तान को अमेरिका और चीन से बड़ी उम्मीद थी, लेकिन अब इन दोनों देशों ने भी साफ कर दिया कि कश्मीर को लेकर उनकी मंशा हस्तक्षेप करने की नहीं है। दोनों ने भारत व पाकिस्तान को बातचीत से राह निकालने को कहा है।

पाकिस्तान के लिए चिंता की बात यह भी है कि अब तक किसी बड़े इस्लामिक देश ने कश्मीर मुद्दे पर मुंह नहीं खोला है।

अमेरिका ने कहा:

अमेरिक में विदेश विभाग की प्रवक्ता मॉर्गन ओर्टागस ने कहा, 'कश्मीर पर अमेरिकी नीति यही रही है कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मसला है और इस मामले पर वार्ता कब और कैसे करनी है इसका फैसला दोनों देशों को ही करना है। अमेरिका की इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हमने सभी पक्षों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। हम शांति और स्थायित्व बनाए रखना चाहते हैं और कश्मीर व अन्य मसलों पर भारत-पाक के बीच सीधी वार्ता का समर्थन करते हैं।'

चीन की प्रतिक्रिया:

चीन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान आपसी बातचीत के जरिए ही किसी भी द्विपक्षीय समस्याओं का समाधान निकाले। दोनों देशों को मौजूदा हालात को बनाए रखने की जरूरत है ताकि तनाव को बढ़ने से रोका जा सके।

भारत की यह रणनीति काम आई:

भारत ने जिस तरह से कश्मीर पुनर्गठन से जुड़े अपने फैसलों को दुनिया के सामने रखा है उसका भी असर हो रहा है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने दुनिया के तमाम प्रमुख देशों के राजनयिकों को धारा 370 समाप्त किए जाने की वजहों के बारे में विस्तार से बताया है। कश्मीर में ज्यादा सेना भेजने व वहां कर्फ्यू लगाए जाने के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। यही वजह है कि यूरोपीय संघ के किसी भी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कुरैशी पहुंचे चीन, जयशंकर रविवार को जाएंगे

नई दिल्ली : कश्मीर पर त्राहिमाम संदेश ले कर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी आनन-फानन में चीन पहुंचे हैं। दो दिन बाद 11 अगस्त को भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर भी चीन जा रहे हैं। वैसे कुरैशी की इस यात्रा का एकमात्र एजेंडा कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के फैसले के खिलाफ समर्थन जुटाना है। दूसरी तरफ जयशंकर की यात्रा का एजेंडा बहुत बड़ा है। निश्चित तौर पर जयशंकर की यात्रा के दौरान कश्मीर का मुद्दा भी उठेगा लेकिन यह मुख्य तौर पर राष्ट्रपति शी चिनफिंग की सितंबर, 2019 में होने वाली भारत यात्रा की तैयारियों को लेकर है।