Asteroid Alert: वैज्ञानिकों को धरती के करीब नया एस्टेरॉयड (पुच्छल तारा) मिला है। यह धरती की ओर बढ़ रहा है और अनुमान है कि यह अगले महीने काफी करीब आ जाएगा और यहां से एक छोटे चंद्रमा की तरह नजर आएगा। अंतरिक्ष में पाए जाने वाले चट्टानी एस्टेरॉयड से अलग यह एक रॉकेट का हिस्सा है। कहा जा रहा है कि यह 54 साल पहले NASA के भेजे हुए रॉकेट का हिस्सा है जिसके चंद्रमा पर लैंड करने के लिए भेजा गया था, लेकिन लैंडिंग विफल रही थी। जब उसे वापस धरती पर लाया जा रहा था, तभी उसका कुछ हिस्सा अंतरिक्ष में बना रह गया।

इस एस्टेरॉयड का पता लगाने वाले वैज्ञानिक पॉल चोडस कहते हैं, मैं इसे देखकर हैरान हूं। अंतरिक्ष में इस तरह की चीजों को ढूंढ़ना मेरा शौक है। यह काम मैं दशकों से कर रहा हूं। इस एस्टेरॉयड को 2020 SO का नाम दिया गया है। वास्तव में यह नासा के छोड़े सेंटूर रॉकेट का ऊपरी भाग है, जो 1966 में छोड़ा गया था। नासा का यह मिशन विफर रहा था। यह चंद्रमा की सतह से टकराकर ब्लास्ट हो गया था। इस साल भारत का चंद्रमा पर भेजा गया लेंडर अभियान विफल रहा था।

बीते सितंबर महीने में दुनिया जब कोरोना संक्रमण से जूझ रही थी उसी दौरान चोडस ने अमेरिका के हवाई द्वीप से टेलीस्कोप के जरिये इस एस्टेरॉयड सरीखे रॉकेट के टुकड़े को ढूंढ़ निकाला। सोलर सिस्टम में मौजूद यह चमकीला स्टेरॉयड उसी तरह से सूर्य के चक्कर लगा रहा है जिस तरह से पृथ्वी लगा रही है। एक एस्टेरॉयड के रूप में इसका व्यवहार हैरान कर देने वाला है। यह करीब 26 फीट लंबा है। यह 32 फीट लंबे सेंटूर का हिस्सा है जिसकी चौड़ाई दस फीट थी। यह 2,400 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से धरती की ओर आ रहा है, जो किसी सामान्य एस्टेरॉयड के धरती की ओर आने की रफ्तार से काफी कम है। चोडस नासा के सेंटर फॉर नियर अर्थ ऑब्जेक्ट स्टडीज में डायरेक्टर हैं।

Posted By: Arvind Dubey

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