तेहरान। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामनेई ने अमेरिकी से किसी भी तरह की वार्ता से इन्कार किया है। सऊदी तेल संयंत्रों पर हमले के बाद दोनों देशों में तनाव चरम पर पहुंच गया है। खामनेई ने मंगलवार को यहां कहा, ईरान पर ज्यादा से ज्यादा दबाव बनाने की नीति पूरी तरह बेमानी है। ईरान के सभी अधिकारी इस बात को लेकर एकमत हैं कि अमेरिकी से किसी भी स्तर पर कोई बातचीत नहीं होनी चाहिए।इससे पहले राष्ट्रपति हसन रूहानी भी प्रतिबंध हटाए जाने से पहले अमेरिका से सीधी बातचीत से साफ इन्कार कर चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा था कि उनकी सेना सऊदी तेल संयंत्रों पर हुए अभूतपूर्व हमलों का जवाब देने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने इसे अपने सहयोगी देश पर बड़ा हमला बताते हुए इस बात की आशंका जताई थी कि इसके पीछे ईरान का हाथ हो सकता है। ट्रंप के इस बयान से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति भवन ने हाल में कहा था कि अगले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के अधिवेशन से इतर राष्ट्रपति ट्रंप अपने ईरानी समकक्ष हसन रूहानी से मुलाकात कर सकते हैं। खामनेई ने इस संभावना से इन्कार करते हुए कहा, अमेरिकियों से किसी बातचीत का कोई मतलब ही नहीं बनता। यदि ऐसा हुआ तो इसका मतलब निकाला जाएगा कि हम पर दबाव बनाने की उनकी नीति कामयाब रही।

यही वजह है कि रूहानी, विदेश मंत्री मुहम्मद जवाद जरीफ और अन्य अधिकारियों ने एक सुर में एलान किया है कि हम अमेरिका से कोई बातचीत नहीं करेंगे। पिछले साल मई में वर्ष 2015 के परमाणु करार से हटने के ट्रंप के एलान के बाद से ईरान और अमेरिका में तनातनी चल रही है। ईरान पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका ने उस पर फिर प्रतिबंध लगा दिए हैं। जवाब में ईरान ने भी अपना परमाणु कार्यक्रम फिर शुरू करने की बात कही है।