मल्‍टीमीडिया डेस्‍क। बहुचर्चित अयोध्‍या मामले में भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ चुका है। निर्णय के अनुसार विवादित भूमि पर रामलला विराजित रहेंगे। इसके लिए मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के निर्माण के लिए अलग से भूमि दिए जाने का भी आदेश है। इस फैसले पर सुबह से ही देश भर की निगाहें टिकी हुईं थीं। भारत के अलावा विश्‍व भर की मीडिया में भी यह निर्णय चर्चा का विषय बना रहा। आइये जानते हैं अंतरराष्‍ट्रीय मीडिया में इस पर क्‍या प्रतिक्रिया रही।

- पाकिस्‍तान के जियो टीवी चैनल पर सुबह से लेकर दोपहर तक अयोध्‍या पर निर्णय ही चर्चा में रहा। चूंकि कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को भी मस्जिद के लिए जमीन देने का निर्देश दिया है ऐसे में पाक मीडिया कोई तल्‍ख टिप्‍पणी नहीं कर पाया। जियो चैनल के हामिद मीर ने इतना ही कहा कि कोर्ट ने दोनों पक्षों को साधने का प्रयास किया है।

- पाकिस्‍तान के डान अखबार ने इस मामले में बेहद तल्‍ख टिप्‍पणी की है। अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित रिपोर्ट में डान ने हालांकि फैसले का तो सही उल्‍लेख किया है लेकिन डान अपनी तरफ से एकतरफा विचार व्‍यक्‍त करने से खुद को रोक नहीं पाया। लिखा है कि, "भारत के सुप्रीम कोर्ट ने ने शनिवार को विवादित भूमि पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया। अयोध्या की भूमि पर एक मंदिर का निर्माण किया जाएगा। यह वही जगह है जहां कट्टरपंथी हिंदुओं ने 1992 में 16 वीं शताब्दी की एक मस्जिद को ध्वस्त कर दिया था।" हालांकि डान ने इस फैसले को हिंदू राष्‍ट्रवादियों की बड़ी जीत बताया। इस पाकिस्‍तानी मीडिया ने अयोध्‍या पर फैसले को राजनीति से भी जोड़कर देखा और कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के चुनाव में राम मंदिर बनाने का वादा किया था, जिसके बूते ही वे सत्‍ता में आए।

- वाशिंगटन पोस्‍ट ने अपने शीर्षक में इसे भारत का सबसे विवादित धार्मिक स्‍थल बताया। पोस्‍ट ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि, "दशकों पुराने विवाद में सामने आया यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी जीत है। हिंदू भगवान राम को एक मंदिर का निर्माण भारत की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का लंबे समय से उद्देश्य रहा है।" वाशिंगटन पोस्‍ट ने पीएम मोदी के उस ट्वीट का भी उल्‍लेख किया है, जिसमें उन्‍होंने देश से शांति बनाए रखने की अपील की थी।

- द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून ने इसे हिंदू राष्‍ट्रवादियों की जीत बताया है। खबर में लिखा है कि भारत की सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू मंदिर के निर्माण का रास्‍ता साफ कर दिया है। आगे यह भी कहा है कि, मोदी की हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के समर्थकों सहित भारत के बहुसंख्यक हिंदू कट्टरपंथियों का मानना है कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था।

- न्‍यूयार्क टाइम्‍स ने लिखा है कि, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने शनिवार को हिंदुओं के पक्ष में फैसला सुनाया। इसे लेकर मुसलमानों का दावा है कि तीन दशक पहले वहां मस्जिद जहां खड़ी थी जिसे उन्मादी भीड़ द्वारा ध्वस्त किया गया था। यह निर्णय हिंदुओं को एक मंदिर का निर्माण करने की अनुमति देता है। कई हिंदुओं का मानना है कि विवादित स्थल उनके पूजनीय भगवान राम का जन्मस्थान था और मुगल शासन से पहले के मंदिर को ध्वस्त कर दिया गया था।

Posted By: Navodit Saktawat