इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पीएम इमरान खान की मुसीबत जल्द खत्म होने वाली नहीं है। पद छोड़ने के लिए उनको विपक्षी दलों की तरफ से मिले 48 घंटों की समयसीमा शनिवार को खत्म हो रही है। सेना पहले ही साफ कर चुकी है कि वह इस मामले में इमरान खान के साथ नहीं है। विपक्षी नेताओं ने फायरब्रांड मौलवी और राजनेता मौलाना फजलुर रहमान के नेतृत्व में गुरुवार को प्रधानमंत्री इमरान खान को इस्तीफा देने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने कहा कि दो दिनों के बाद बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शन एक नई दिशा लेगा।

दक्षिणपंथी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (JUI-F) नेता 'आजादी मार्च' के रूप में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे हैं। धांधली का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री इमरान खान के इस्तीफे की मांग करते हुए किए जा रहे इन प्रदर्शनों के गुरुवार को आठ दिन पूरे हो गए। गुरुवार रात हजारों प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं दे रहे हैं, तो सरकार के वार्ताकारों को बातचीत के लिए नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे पास आने की कोई जरूरत नहीं है। यदि आप आते हैं, तो आपको सत्ता के गलियारों को पीछे छोड़ने के इरादे से आना चाहिए।

मौलाना फजलुर रहमान ने प्रधानमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि अब आप एक मुहाने पर हैं। अब आपको यह तय करना होगा कि क्या आप वहां बने रहना चाहते हैं या बाहर आना चाहते हैं और लोगों को उनका हक वापस देते हैं। इस बीच, विपक्ष की रहबर समिति ने कहा कि वह सरकार पर दबाव बढ़ेगा।

जयूआई-एफ के नेता अकरम खान दुर्रानी ने कहा कि दो दिनों के बाद आजादी मार्च एक नई दिशा लेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता दृढ़ संकल्पित हैं, यहां तक ​​कि तीन महीने तक रहने को तैयार हैं। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता फरहतुल्लाह बाबर ने कहा कि विपक्ष सरकार पर दबाव बना रहा है और यह पहला चरण है।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai