बीजिंग। चीन की राजधानी बीजिंग जल्द ही दुनिया के 200 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची से बाहर निकल जाएगा। प्रदूषण से निपटने के लिए यहां युद्धस्त पर साल 2014 से चलाए गए अभियान का नतीजा अब सामने आ रहा है। यह जानकारी स्विट्जरलैंड स्थित एयर क्वालिटी टेक्नोलॉजी कंपनी IQAir AirVisual ने बीजिंग में जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर दी।

बीजिंग में अगस्त में खतरनाक धुंध अपने निम्नतर स्तर पर दर्ज की गई। साल 2018 की तुलना में इस साल फेफड़े को नुकसान पहुंचाने वाले छोटे पार्टिकुलेट मैटर (PM2.5) में लगभग 20 फीसद तक गिरावट देखी गई है। वहीं, साल 2017 की तुलना में PM2.5 के स्तर में करीब एक तिहाई की कमी दर्ज की गई है।

राजधानी में साल 2014 में प्रदूषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर शुरू किए गए अभियान की वजह से बीजिंग इस लक्ष्य को हासिल करने में सफल हुआ है। इसके लिए प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को बीजिंग में या तो बंद करवा दिया गया या उन्हें दूसरी जगहों पर शिफ्ट कर दिया गया। इसके साथ ही ईंधन और उत्सर्जन मानकों में सुधार किया गया और शहर व आस-पास के क्षेत्रों में कोयले की खपत को कम करने कि दिशा में काम किया गया।

हालांकि, साल 2019 में शहर की हवा की गुणवत्ता अभी भी डब्ल्यूएचओ के वार्षिक औसत से चार गुना ज्यादा खराब है। विश्व एजेंसी के अनुसार, हवा में PM2.5 का स्तर 10 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए। इससे ज्यादा मात्रा होने पर हवा जहरीली बन जाती है। बीजिंग की हवा में इसकी मात्रा 35 माइक्रोग्राम है, जो देश के अपने राष्ट्रीय मानक से भी अधिक है।

साल के पहले आठ महीनों में बीजिंग में औसत प्रति घंटा PM2.5 की मात्रा 42.6 माइक्रोग्राम मापी गई थी, जो पिछले साल की तुलना में 19.3 फीसद कम है। बताते चलें कि साल 2009 में इसी अवधि में PM2.5 की मात्रा करीब दो गुनी थी। चीन ने कहा है कि वह साल 2019 में प्रदूषण के खिलाफ अपने अभियान के दौरान अधिक कुशल और लक्षित उपाय अपनाएगा। इसके साथ ही वह प्रदूषण के खिलाफ अपने प्रयासों को कमजोर नहीं करेगा या उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करेगा।

बीजिंग ने पहले ही कहा है कि वह इस महीने आतिशबादी को प्रतिबंधित करेगा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि एक अक्टूबर को पीपुल्स रिपब्लिक की स्थापना की 70वीं वर्षगांठ के समारोह के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर न बढ़े।