ओमाहा। दिग्गज अमेरिकी कंपनियों की कमान संभालने वाले भारतीयों की सूची में जल्द एक और नाम शामिल हो सकता है। दुनिया के सबसे सफल निवेशक वारेन बफेट ने बर्कशायर हैथवे में उनके संभावित उत्तराधिकारी के तौर पर अजीत जैन का भी नाम लिया है। पिछले सप्ताह शनिवार को बर्कशायर हैथवे के तिमाही नतीजे जाहिर करने से कुछ घंटे पहले कई निवेशकों ने उनसे यह सवाल पूछा था।

हालांकि, बर्कशायर हैथवे के सीईओ बफेट ने सीधे तौर पर इसका कोई जवाब नहीं दिया। मगर, उन्होंने कहा कि 57 वर्षीय ग्रेगरी एबल और 67 वर्षीय अजीत जैन को पिछले वर्ष ही निदेशक बोर्ड में शामिल किया गया है। निवेशकों के सवालों का जवाब देने के लिए निकट भविष्य में ये दोनों भी उनके और कंपनी के वाइस चेयरमैन चार्ली मंगर के साथ मंच पर दिखाई देंगे। इससे यह अंदाजा लगाया जाने लगा है कि इन्हीं दोनों में एक बफेट का उत्तराधिकारी होगा।

जानिए जैन का सफर

अजीत जैन 1986 में बर्कशायर हैथवे के बीमा कारोबार से जुड़े थे। अभी वह वाइस चेयरमैन के तौर पर बर्कशायर हैथवे के बीमा कारोबार का नेतृत्व कर रहे हैं। जैन का जन्म ओडिशा में हुआ है। वह आईआईटी-खड़गपुर के पूर्व छात्र हैं। उन्होंने साल 1972 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया था। उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है। वह आईबीएम और मैकेंजी एंड कंपनी में भी काम कर चुके हैं। वह अंशु जैन का बड़े चचेरे भाई हैं, जो डचेस बैंक के पूर्व को-सीईओ थे।

जैन ने साल 1973 से 1976 तक आईबीएम के लिए भारत में डेटा-प्रोसेसिंग ऑपरेशन्स के सेल्समैन का काम किया। साल 1973 में उन्हें अपने क्षेत्र में 'रूकी ऑफ द ईयर' नामित किया गया था। साल 1976 में जब आईबीएम ने भारत में अपने ऑपरेशन्स बंद कर दिए, तो उनकी नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद साल 1978 में जैन अमेरिका चले गए, जहां उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से एमबीए किआ और मैकिन्से एंड कंपनी से जुड़ गए।

साल 1980 के दशक की शुरुआत में वे भारत लौटे और शादी कर ली। उनकी पत्नी को अमेरिका में रहना पसंद था, लिहाजा वह फिर से अमेरिका चले गए। साल 1986 में वॉरेन बफेट के इंश्योरेंस ऑपरेशन्स पर काम करने के लिए उन्होंने मैकिन्से को छोड़ दिया। जैन को उनके पूर्व बॉस माइकल गोल्डबर्ग ने हैथवे में काम करने का न्योता दिया था, जो 1982 में बर्कशायर हैथवे में शामिल होने के लिए मैकिन्से एंड कंपनी को छोड़ गए थे।

इसलिए पसंद हैं अजीत जैन

बफेट कई मौकों पर अजीत जैन की क्षमता, गति और फैसले लेने के साथ महत्वपूर्ण कार्यों को संभालने की उनकी क्षमता के लिए खुले तौर पर प्रशंसा कर चुके हैं। उन्होंने बर्कशायर शेयरधारकों के लिए कई बिलियन डॉलर कमाने के लिए जैन की तारीफ की है। साल 2017 में कंपनी को दिए अपने वार्षिक पत्र में बफेट ने कहा था: "अजीत ने बर्कशायर के शेयरधारकों के लिए दसियों अरबों डॉलर कमाए हैं।

अगर कभी कोई दूसरा अजीत जैन हो और आप उसके लिए मुझे बदल सकते हैं, तो संकोच नहीं करना। तुरंत वह सौदा कर लेना। जैन के काम से बहुत प्रभावित रहे बफेट ने एक बार उनके माता-पिता से भी पूछा था कि क्या उनके पास एक और अजीत है। दरअसल, वह बीमा कारोबार के लिए अद्वितीय दिमाग होने के लिए जैन की तारीफ कर रहे थे।

बफेट अपने बच्चों को नहीं देना चाहते हैं कमान

अमेजन के सीईओ जेफ बेजोस और माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के बाद वारेन बफेट दुनिया के तीसरे सबसे धनी व्यक्ति हैं। उनके पास करीब 90 अरब डॉलर (6.226 लाख करोड़ रुपए) की संपत्ति है। इसके बावजूद वह एक साधारण मकान में रहते हैं, जो उन्होंने 1958 में खरीदा था।

बफेट कभी भी अपने बच्चों - सुसान, हॉवर्ड और पीटर को उत्तराधिकारी बनाने के विचार को पसंद नहीं किया है। वे तीनों कई चैरिटी में शामिल रहे हैं। केवल हावर्ड को बर्कशायर हैथवे के ऑर्गेनाइजेशनल चार्ट में निदेशक मंडल के सदस्य के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। साल 2011 में बफेट ने कहा था कि वह चाहते हैं कि उनका बेटा "होवी" निदेशक मंडल के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में उनकी जगह शामिल हो।

गूगल में निवेश नहीं करना बड़ी भूल

हर साल बर्कशायर हैथवे के वित्तीय नतीजे जाहिर करने से पहले बफेट निवेशकों के सवालों का जवाब देते हैं। इस वर्ष भी इस सवाल-जवाब के लिए हजारों निवेशक जुटे थे। बफेट ने इस दौरान सभी मुद्दों पर बेबाकी से राय जाहिर की। उन्होंने कंपनी द्वारा गूगल में निवेश नहीं करने को "शर्मनाक" करार दिया। बफेट ने कहा कि हम देखते रह गए और गूगल क्या से क्या बन गई। हालांकि, उन्होंने फिर भी नहीं बताया कि कंपनी अब गूगल में निवेश करेगी या नहीं। बर्कशायर हैथवे ने एपल के अलावा हाल ही में अमेजन में शेयर खरीदे हैं।

बोइंग की मौजूदा हालत पर बफेट ने कहा कि उन्हें 737 मैक्स विमानों से यात्रा करने में बिल्कुल हिचकिचाहट नहीं होगी। कई अन्य विमानन कंपनियों में निवेश करने वाले बफेट ने बोइंग में कोई निवेश नहीं किया है। गौरतलब है कि बोइंग के दो 737 मैक्स विमान इस वर्ष मार्च में क्रैश हो गए थे, जबकि एक 737 विमान पिछले सप्ताह शुक्रवार को फ्लोरिडा में उतरते वक्त रनवे से फिसलकर पास की नदी में चला गया था।

ये भारतवंशी संभाल रहे एमएनसी की कमान

लंबे समय से भारतीय दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। चेन्नई में जन्मे सुंदर पिचाई गूगल के सीईओ हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने सत्य नडेला को सीईओ बनाया है, उनका जन्म हैदराबाद में हुआ था। हैदराबाद में ही जन्मे शांतनु नारायण एडोब सिस्टम्स के सीईओ हैं। नोकिया के सीईओ राजीव सूरी का जन्म भारत में हुआ है। इंद्रा नूई पेप्सिको की सीईओ और चेयरमैन रह चुकी हैं, उनका जन्म तमिलनाडु में हुआ है। अभी वह अमेजन के निदेशक बोर्ड की सदस्य हैं। मास्टरकार्ड की कमान पुणे में जन्मे अजय बंगा संभाल रहे हैं।