लंदन/नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने पर ब्रिटेन के नामी मेडिकल जर्नल The Lancet ने संपादकीय लिखा है। इस मेडिकल जर्नल के मुताबिक, मोदी सरकार के इस कदम से घाटी में लोगों की सेहत के साथ ही सुरक्षा और आजादी पर संकट गहरा गया है। बहरहाल, इंंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इसका तगड़ा जवाब दिया है।

इंंडियन मेडिकल एसोसिएश ने चिट्ठी लिखकर The Lancet से कहा है कि एक सियासी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देकर जर्नल ने अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया है।

संपादकीय में लिखी गई ये बातें

मेडिकल जर्नल के संपादकीय में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने को एक विवादास्पद फैसला बताया और लिखा कि इससे कश्मीरी लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना होगा। लिखा गया है कि भले ही नरेंद्र मोदी सरकार कह रही है कि इससे कश्मीर का विकास होगा और लोगों की जिंदगी में खुशहाली आएगी, लेकिन इससे पहले दशकों से चले आ रहे इस विवाद के कारण हुए घावों को भरना होगा और कोशिश करना होगी कि आगे हिंसा न भड़के।

मेडिकल जर्नल का मानना है कि कश्मीर में दशकों से अस्थीरता का वातावरण है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि यहां शेष भारत से ज्यादा विकास हुआ है। मेडिकल जर्नल एक अध्ययन के हवाले से लिखा है कि करीब आधे कश्मीरी खुद को असुरक्षित मानते हैं। पांच में से एक परिवार के सदस्य की मौत हिंंसा में हुई है।

IMA ने लिखा यह जवाबी खत

इसके जवाब में IMA ने जर्नल के संपादकीय प्रभारी रिचर्ड होर्टन को खत लिखा, जिसमेंं कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि The Lancet जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल ने अपनी छवि के विपरीत एक राजनीतिक मुद्दे पर कमेंट किया है। यह भारत के अंदरूनी मामलों में दखल है। वैसे कश्मीर मुद्दा ब्रिटिश सरकार की देन है, जो वे अपने पीछे छोड़ गए हैं। IMA ने इसके साथ ही मेडिकल जर्नल की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए।

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