लंदन। ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन (ईयू) के बीच अलगाव की शर्तों को लेकर सहमति बन गई है। लेकिन ब्रिटिश संसद से इसको स्वीकृति मिलना अभी बाकी है। ब्रिटेन ने 28 देशों के यूरोपीय यूनियन समूह से 31 अक्टूबर को अलग होने का एलान कर रखा है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने समझौते को बड़ी सफलता बताया है, वहीं यूरोपीय यूनियन के राष्ट्रपति जीन क्लाउड जंकर ने इसे स्पष्ट और संतुलित समझौता बताया है और इसे अपनी वचनबद्धता का दस्तावेज करार दिया। जंकर ने समझौते को अपनी संस्तुति के साथ सदस्य देशों के पास विचार के लिए भेज दिया है। ब्रसेल्स में हो रही ईयू समिट में इस समझौते पर चर्चा होगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा। लेकिन समझौते के लिए प्रधानमंत्री जॉनसन को ब्रिटिश संसद में समर्थन जुटाना मुश्किल हो सकता है। विपक्ष और खुद की कंजरवेटिव पार्टी के कुछ सांसदों के विरोध के साथ ही उन्हें सरकार को समर्थन दे रही आयरलैंड की डेमोक्रेटिक यूनियनिस्ट पार्टी (डीयूपी)का विरोध भी झेलना पड़ सकता है।

डीयूपी ने बयान जारी कर प्रस्तावित कर व्यवस्था पर असहमति जताई है। वह आयरलैंड के लिए ज्यादा सहूलियतों की मांग कर रही है। लेकिन जॉनसन इस बात को लेकर चिंतित नहीं हैं। उन्होंने ट्वीट कर कहा- कि हम पूर्व के विरोधाभासों को खत्म कर हम नए समझौते पर पहुंच गए हैं। यह सब ईयू नेताओं की समिट से ठीक पहले हुआ। इसलिए इस पर सहमति बनाना और स्वीकृति प्राप्त करना अब आसान होगा। जंकर ने ईयू के काउंसिल प्रेसिडेंट डोनाल्ड टस्क को लिखे पत्र में कहा है कि अलगाव की प्रक्रिया को पूरा करते हुए आगे बढ़ने का यह काफी अहम समय है। यह कार्य तेज गति से पूरा करने की जरूरत है। यह ईयू के ब्रिटेन के साथ भविष्य के सहयोग के लिए जरूरी है। जंकर और जॉनसन ने अपनी-अपनी संसदों से समझौते के समर्थन करने का अनुरोध किया है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने उम्मीद जताई है कि समझौते के मसौदे को ब्रिटिश संसद में समर्थन मिलेगा। उल्लेखनीय है कि बोरिस जॉनसन की पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री टेरीजा मे ईयू के साथ समझौते के मसौदे को ब्रिटिश संसद में पारित कराने में तीन बार सफल नहीं हो पाई थीं। इसी के बाद उन्होंने पद से इस्तीफा दिया था।

Posted By: Shashank Shekhar Bajpai