बीजिंग। चीन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बेल्ट-वन रोड (OBOR) का शुरुआत से ही भारत द्वारा विरोध किया जा रहा है। हाल ही में चीन द्वारा इस प्रोजेक्ट को लेकर दूसरा सम्मेलन आयोजित किया गया है, लेकिन एक बार फिर भारत ने इससे दूरी बना ली है।

हालांकि इस पर चीन ने मामले को गरमाने के बजाय कहा है कि भारत इस परियोजना के मकसद को नहीं समझ रहा। नई दिल्ली पहले इंतजार करे और देखे, इसके बाद परियोजना में शामिल होने को लेकर कोई फैसला ले। भारत ने 2017 में चीन द्वारा आयोजित पहले सम्मेलन से भी दूरी बनाई थी।

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने साल 2013 में अरबों डॉलर की लागत से तैयार होने वाला ओबीओआर प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसका मकसद यूरोप, मध्य एशिया, अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया को चीन से जमीन और समुद्र के माध्यम से जोड़ना है।

इस परियोजना के तहत बने चाइना-पाकिस्तान इकोनोमिक कॉरीडोर (CPEC) के गुलाम कश्मीर से होकर गुजरने की वजह से भारत नाराज है और इस परियोजना का बहिष्कार किए हुए है। इस प्रोजेक्ट के लिए चीन ने 25 से 27 अप्रैल तक दूसरा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया है।

चीन का दावा है कि इस सम्मेलन में 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने की सूचना भेज चुके हैं जिनमें से 40 राष्ट्राध्यक्ष या शासनाध्यक्ष हैं। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ल्यू कांग ने कहा कि OBOR आर्थिक सहयोग का मंच है। इसका क्षेत्रीय विवाद से कोई नाता नहीं है।

चीनी प्रवक्ता ने कहा कि भारत के सम्मेलन में भाग न लेने के इरादे के पीछे कई वजह है। इस मामले में बस इतना ही कहा जा सकता है कि OBOR एक खुला और समन्वित आर्थिक सहयोग का अभियान है, इसका मकसद सभी शामिल देशों का आर्थिक विकास है। यह हर तरह के जमीनी और समुद्री सीमा विवाद से अलग अभियान है।

Posted By: Neeraj Vyas