न्यूयार्क टाइम्स, वाशिंगटन। अमेरिका के सेंटर्स फार डिसीज कंट्रोल (सीडीसी) के निदेशक के मुताबिक कोरोना वायरस की चपेट में आये करीब 25 फीसद लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं दिखाई देते हैं। ऐसे लोगों की भारी तादाद की वजह से इस भयानक बीमारी की रोकथाम करने और इसके फैलने के बारे में कोई अनुमान लगाने में कठिनाई आ सकती है। उधर सीएनएन ने आइसलैंड की रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि वहां पर कोरोना पाजिटिव निकले करीब 50 फीसद लोगों ने कहा कि उन्हें खुद में इस बीमारी के लक्षण नहीं मिले। उधर हांगकांग की एक रिसर्च टीम के मुताबिक चीन में 20 से 40 फीसद मरीजों में इस रोग के लक्षण उभरने से पहले ही उनके जरिये दूसरे लोगों में संक्रमण फैल गया। कोरोना के संबंध में सामने आई इस जानकारी ने सीडीसी की चिंता बहुत बढ़ा दी है।

बिना लक्षण वाले संक्रमितों की बड़ी हुई संख्या को ध्यान में रख किन लोगों को मास्क पहनना है इसके लिए दिशा निर्देशों में बदलाव किया जा रहा है। सीडीसी निदेशक राबर्ट रेडफील्ड ने एक साक्षात्कार में बताया कि इस जानकारी से हमें यह साफ हो रहा है कि यह बीमारी कितनी तेजी से देश में फैल रही है।

उन्होंने कहा कि अभी तक सीडीसी को ओर से यह कई बार कहा गया कि जिन सामान्य लोगों में बीमारी के लक्षण नहीं हैं उन्हें मास्क पहनने की कोई जरूरत नहीं है। लेकिन इस नये तथ्य के सामने आने के बाद हम अपने निर्देशों की ठीक से समीक्षा की जाएगी। शोधकर्ताओं का कहना है कि वे अभी यह पता नहीं लगा पाए हैं कि कितने लोग खुद को अस्वस्थ महसूस किये बिना संक्रमित हुए हैं। लेकिन दिसंबर से इस बीमारी का पता चलने के बाद से कई ऐसे मामले आ चुके हैं जिनमें खुद को स्वस्थ महसूस कर रहे लोगों से दूसरे लोग संक्रमित हुए हैं।

चीन के गुआंगडोंग जिले के जेड नाम के मरीज की कहानी कुछ ऐसी ही थी। वह फरवरी के प्रारंभ में वुहान के एक व्यक्ति के संपर्क में आकर संक्रमित हुआ लेकिन उसमें संक्रमण के लक्षण दिखाई नहीं दिए। हालांकि सातवें दिन तक उसकी नाक और गले में वायरस बड़ी मात्रा में पनप चुका था। शोधकर्ताओं का मानना है कि मरीज जेड का यह अकेला मामला नहीं है।

डायमंड प्रिंसेज क्रूज पर भी जितने लोग संक्रमित हुए उनमें से करीब 18 फीसद लोग ऐसे थे जिनमें बीमारी के लक्षणों का पता नहीं चल पाया। मिनेसोटा विश्वविद्यालय के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डा.माइकल टी ओस्टरहोम के मुताबिक यह वायरस इनफ्लुएंजा वायरस की तरह तेजी से फैलता है। लेकिन इसका गुपचुप तरीके से फैलने का गुण इनफ्लुएंजा वायरस से बिलकुल अलग है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अब तक इसकी कोई वैक्सीन ईजाद न होने की वजह से इससे बचने के लिए सुरक्षित शारीरिक दूरी रखना ही सबसे उचित उपाय है। कुछ संक्रमित लोग जो खुद को स्वस्थ समझ रहे हों लेकिन दूसरों को संक्रमित कर रहे हों। यही एक प्रमुख वजह है कि बहुत से विशेषज्ञ सीडीसी और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) के दिशा निर्देशों को दरकिनार कर सभी के लिए मास्क पहनने को जरूरी बता रहे हैं। इससे बिना लक्षण वाले संक्रमितों से और लोग संक्रमित नहीं हो सकेंगे।

Posted By: Yogendra Sharma

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