कोरोना वायरस महज जानलेवा महामारी ही नहीं है, यह एक ऐसी मुसीबत है जो मनुष्‍य के मन, चेतना, दिमागी क्षमता, स्‍वभाव सभी को बुरी तरह प्रभावित कर रही है। नए शोध यह डराने वाला खुलासा करते हैं कि कोरोना का हमारी नींद, मानसिक शांति पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। यानी इससे बच जाना ही सब कुछ नहीं है, यदि आप इससे बच भी गए तो भी आप दिमागी रूप से भले चंगे रह पाते हैं या नहीं, यह भी जीवन भर की चुनौती है।कोरोना वायरस (कोविड-19) का आम जन-जीवन पर काफी गहरा असर पड़ रहा है। यह जिंदगियों पर भारी पड़ने के साथ ही सामान्य लोगों की मानसिक सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है। अब बड़े पैमाने पर किए गए एक नए अध्ययन से पता चला है कि इस घातक वायरस की चिंता में कई माताएं अनिद्रा और एंग्जाइटी का शिकार हो रही हैं।

इजरायल की बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता लिएट टिकोत्जकी ने कहा, "कोरोना महामारी के दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं। माताओं में एंग्जाइटी और अनिद्रा के साथ ही बच्चों में भी नींद संबंधी समस्याएं पाई जा रही हैं।" स्लीप जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, माताओं में महामारी के दौरान अनिद्रा की समस्या बढ़कर दोगुनी यानी 23 फीसद हो गई है। महामारी से पहले यह समस्या महज 11 फीसद थी। करीब 80 फीसद माताओं ने मध्यम से लेकर उच्च स्तर के एंग्जाइटी की शिकायत भी की। यह निष्कर्ष माताओं से भरवाई गई एक प्रश्नावली के आधार पर निकाला गया है।

अध्ययन में शामिल की गईं इजरायली महिलाओं से कोरोना महामारी से पहले की उनकी मनोदशा के बारे में सवाल पूछे गए थे। उनसे लॉकडाउन में घरों में रहने के दौरान की मनोस्थिति के बारे में भी सवाल किए गए थे। इसके बाद दोनों स्थितियों की तुलना की गई। हालांकि बहुसंख्यक महिलाओं ने अपने बच्चों में नींद संबंधी किसी भी समस्या की शिकायत नहीं की। जबकि करीब 30 फीसद माताओं ने अपने बच्चों की नींद में कमी आने की बात कही।

Posted By: Navodit Saktawat

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