वॉशिंगटन। भारत ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो हफ्ते पहले (G-20 समिट के दौरान) हुई मुलाकात के दौरान उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता के लिए कहा था। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के सामने किए गए इस दावे के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि मोदी ने ट्रम्प के सामने ऐसी कोई गुजारिश नहीं की।

ट्रम्प का बयान सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया कि भारत का शुरू से रुख रहा है कि हर मुद्दा द्विपक्षीय वार्ता से ही हल हो। पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत तभी हो सकती है, जब सीमा पार से आतंकवाद बंद हो।

इससे पहले ट्रम्प ने कश्मीर मसला हल करने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने की पेशकश की। सोमवार को व्हाइट हाउस में ट्रम्प से चर्चा के दौरान इमरान खान ने गिड़गिड़ाते हुए कश्मीर पर मध्यस्थता की अपील की। इस पर ट्रम्प ने कहा कि, 'भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुझसे मुलाकात के दौरान कश्मीर मुद्दा हल करने के लिए मध्यस्थता की बात कही थी। मुझे मध्यस्थ बनकर खुशी होगी।'

ट्रम्प-इमरान के बीच हुई यह बात

ट्रम्प और इमरान की मुलाकात के बाद दोनों की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि कश्मीर मुद्दा हल करने के लिए इमरान अमेरिका के सामने गिड़गिड़ा रहे हैं। इमरान ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि अमेरिका क्षेत्र में शांति कायम करने के लिए कश्मीर मुद्दा हल करने में मदद करे।

इस पर ट्रम्प ने कहा कि दो हफ्ते पहले पीएम मोदी से मेरी मुलाकात हुई थी और उन्होंने कहा था कि क्या आप मध्यस्थता करेंगे...तो मैंने पूछा- किस मुद्दे पर..तो उन्होंने (मोदी) कहा था- कश्मीर पर। यदि दोनों देश चाहते हैं, तो मुझे ऐसा करने में खुशी होगी। कश्मीर बहुत अच्छी जगह है, लेकिन अभी वहां बम ही बम हैं।

इस पर इमरान ने ट्रम्प की चापलूसी करते हुए कहा कि उनकी यह बात करोड़ों लोग सुन रहे होंगे और उनके लिए दुआ कर रहे होंगे।

ट्रम्प ने झूठ बोला

ट्रम्प की मध्यस्थ की पेशकश की खबर आने के बाद भारत में विरोध शुरू हो गया। ट्रम्प पर आरोप लगा है कि उन्होंने मोदी को लेकर इमरान के सामने यह झूठ बोला कि भारत के प्रधानमंत्री ने भी कश्मीर विवाद हल करने के लिए अमेरिका से मदद मांगी है।

आधिकारिक बयान में कश्मीर का जिक्र नहीं

हालांकि, इमरान खान-ट्रम्प की बातचीत का बाद व्हाइट हाउस में प्रेस रिलीज जारी की। इसमें कश्मीर मुद्दे का जिक्र नहीं है। प्रेस रिलीज में कई मुद्दों का जिक्र है, जिसमें अफगानिस्तान खासतौर पर शामिल है।

थरूर-उमर ने दी ऐसी प्रतिक्रिया

ट्रम्प का बयान आने के बाद थरूर ने ट्वीट किया और लिखा- मैं ईमानदारी से सोचता हूं कि ट्रम्प को इस बात का थोड़ा भी अंदाजा नहीं है कि वह किस बारे में बात कर रहे हैं। उन्हें या तो ब्रीफ नहीं किया गया है या समझाया नहीं गया है कि मोदी क्या कह रहे थे या भारत की स्थिति थर्ड पार्टी मध्यस्थता पर क्या है। विदेश मंत्रालय को यह स्पष्ट करना चाहिए कि दिल्ली ने कभी मध्यस्थता की बात नहीं कही।

वहीं, उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट में सवाल उठाया कि क्या अब भारत सरकार ट्रम्प को झूठा कहेगी या यह कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता पर भारत के स्टैंड में बदलाव है? हालांकि, उमर ने अगले ट्वीट में यह भी लिखा कि निजी तौर पर मुझे नहीं लगता कि ट्रम्प को पता होगा कि वे क्या बोल रहे हैं।

गौरतलब है भारत की हमेशा से कश्मीर मुद्दे को लेकर यह पॉलिसी रही है कि यह मुद्दा दो देशों भारत और पाकिस्तान के बीच का है, इसलिए इसको दोनों देश ही सुलझाएंगे और इस मामले में किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए ट्रंप का यह बयान कोई मायने नहीं रखता है।

बता दें, इमरान खान तीन दिनों के अमेरिकी दौरे पर हैं। व्हाइट हाउस में ट्रम्प के साथ मुलाकात के दौरान इमरान खान के साथ पाक सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा, आईएसआई प्रमुख ले. जनरल फैज हमीद और विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी मौजूद थे।

ट्रम्प से मुलाकात के बाद कुरैशी ने ट्वीट किया, "पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यहां "नया पाकिस्तान" के अपने दृष्टिकोण को सामने रखने और द्विपक्षीय संबंधों के एक नए युग की शुरुआत करने के लिए आए हैं। हम अपने क्षेत्र में शांति और समृद्धि की योजना के साथ आए हैं।"

अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर तनाव आ गया है। ट्रम्प ने सार्वजनिक तौर पर पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा था कि आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका को पाकिस्तान से झूठ और छल के अलावा कुछ नहीं मिला है। आतंकी गुटों को समर्थन और पनाह देने पर अमेरिका ने पाकिस्तान को सैन्य सहायता समेत अन्य मदद भी रोक दी है।

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