काहिरा। मिस्र संवैधानिक संशोधनों के लिए शनिवार से तीन दिवसीय जनमत संग्रह शुरू हो चुका है। इसके बाद राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सीसी साल 2030 तक पद पर बने रह सकते हैं। इस सप्ताह संसद ने प्रस्तावों को भारी बहुमत से मंजूरी दी, जिससे सेना की भूमिका भी बढ़ेगी और न्यायिक नियुक्तियों पर राष्ट्रपति की शक्ति का विस्तार भी करेगा।

समर्थकों का तर्क है कि सीसी ने मिस्र को स्थिर कर दिया है और महत्वपूर्ण आर्थिक सुधारों को पूरा करने के लिए अधिक समय की आवश्यकता है। वहीं, आलोचकों का कहना है कि उन्हें डर है कि परिवर्तन बड़े पैमाने पर सिक्योरिटी क्रैकडाउन के बाद असंतोष के लिए जगह सीमित हो जाएगी।

संविधान के अनुच्छेद 140 में संशोधन के बाद राष्ट्रपति का कार्यकाल चार से छह साल तक बढ़ जाएगा। दो से अधिक बार सेवा करने वाले किसी भी राष्ट्रपति पर लगे प्रतिबंध को लगातार दो से अधिक बार राष्ट्रपति बनने में बदल दिया जाएगा।

एक अतिरिक्त क्लॉज के अनुसार, साल 2018 में चुनावी जीत के बाद से वर्तमान में राष्ट्रपति का कार्यकाल चार की जगह छह साल कर दिया जाएगा और उसे साल 2024 में तीसरे कार्यकाल में चुनाव लड़ने की इजाजत देगा। सेना की भूमिका पर संविधान के अनुच्छेद 200 का विस्तार किया जाता है।

इससे सेना का यह कर्तव्य होगा कि वह संविधान और लोकतंत्र, देश और उसके नागरिक स्वभाव, लोगों के अधिकारों और व्यक्तियों की स्वतंत्रता के अधिकारों की रक्षा करे। संशोधन में उपराष्ट्रपति का पद भी सृजित करने की बात कही गई है। इससे राष्ट्रपति एक या एक से अधिक उप राष्ट्रपतियों की नियुक्ति कर सकते हैं।

वे प्रधान न्यायाधीशों को चुनने के साथ ही ज्यूरी के द्वारा पहले से चुने गए वरिष्ठ उम्मीदवारों के पूल से सरकारी वकील को चुन सकेंगे। वे संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को निर्धारित करते हुए कम से कम 25 प्रतिशत का कोटा बनाएंगे।

सरकार समर्थक संसदीय गुट को सपोर्ट इजिप्ट के नाम से जाना जाता है। इसी ने संविधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है। संसद की विधायी समिति की रिपोर्ट के अनुसार, 155 सदस्यों ने प्रारंभिक प्रस्ताव पेश किया। मंगलवार को मिस्र की संसद के 596 सदस्यों में से 531 ने परिवर्तनों के पक्ष में मतदान किया।